मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : कुआं का धुआं

झांकी : कुआं का धुआं

अजय भट्टाचार्य

संसद भवन में महिला विधेयक बिल के दौरान राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने ओम प्रकाश वाल्मीकि लिखित ठाकुर कविता ‘ठाकुर का कुआं’ पढ़कर बिहार की राजनीति में विवाद का धुआं उठा दिया है। इस कविता पाठ के ७-८ दिन के बाद राजद विधायक चेतन आनंद ने पार्टी लाइन से हटकर सोशल मीडिया ठाकुर समाज अर्थात भूमिहार समाज का झंडा उठाया और मनोज झा को चेतावनी दे दी। उनके पिता आनंद मोहन ने तो इतना तक कह दिया कि अगर मैं उस समय सदन में होता तो राख से जीव खींच लेता और सभापति की ओर उछाल देता। बिहार में राख मतलब छाउर होता है अर्थात जले हुए लकड़ी का अंतिम अंश। दूसरी तरफ जन अधिकार पार्टी के नेता और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने मनोज झा का समर्थन कर इस धुएं में चिंगारी उठा दी है। पप्पू ने आनंद मोहन का नाम लिए बिना कहा कि आजकल कंस और रावण का बोलबाला हो गया है। पूरा खेल जाति की अस्मिता का नहीं, राजनीति की अस्मिता का है। पप्पू यादव ने सांसद मनोज झा को जान से मारने वालों को नसीहत देते हुए कहा कि जन अधिकार पार्टी सांसद मनोज झा के साथ खड़ी है। कोई इनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इधर भाजपा के एमएलसी नीरज बबलू सहित भाजपा के तमाम ठाकुर नेताओं ने मनोज झा का पुतला जलाकर विरोध किया। भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात के प्रभारी मनीष सिंह ने पटना के एसएसपी को मनोज झा के खिलाफ आवेदन देकर केस करने का आग्रह किया है।

बीआरएस में बेचैनी
तेलंगाना में केसीआर की पार्टी में मची भगदड़ का फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है। कांग्रेस के दामोदर रेड्डी के परिवार का स्वागत कर रही है और नारायण रेड्डी को गले लगाने की तैयारी कर रही है। इन दोनों का पूर्ववर्ती महबूबनगर जिले में मजबूत आधार है, जिससे कांग्रेस को फायदा मिल सकता है। इस बीच, अफवाहें उड़ रही हैं कि बोथ विधायक राठौड़ बाबू राव, जिनकी जगह बीआरएस ने दूसरे उम्मीदवार को चुना था, जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। घनपुर विधानसभा क्षेत्र असमंजस में उलझा हुआ है, मौजूदा विधायक टी राजैया ने शुरुआत में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव से मुलाकात की, जिससे समझौते की अटकलें तेज हो गर्इं। राजैया ने बाद में स्पष्ट किया कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है और वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का इरादा रखते हैं। उप्पल में केटी रामा राव के कार्यक्रम से विधायक बेटी सुभाष रेड्डी की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व विधायक वेमुला वीरेशम पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं और उनके जल्द ही कांग्रेस में शामिल होने की उम्मीद है। इस बीच, कांग्रेस को पूर्व मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव के दलबदल से बढ़ावा मिला है, जो एक नेता थे, जो बीआरएस के पलेयर टिकट आवंटित नहीं करने के पैâसले से नाराज थे। दलबदल की शृंखला के कारण बीआरएस वैâडर बेचैन हो गया है। हालांकि, नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। इसके बावजूद कई नेता पार्टी में बने रहने को लेकर उदासीन हैं।

भाजपा में कुरुक्षेत्र
२०२४ के लोकसभा चुनावों से पहले गुजरात भाजपा के भीतर खींचतान से शीर्ष गुजराती नेतृत्व परेशान है। पार्टी के नेता और उनसे जुड़े गुट खुलेआम एक-दूसरे को मात देने और उस पार्टी में हिसाब बराबर करने में लगे हुए हैं,जो अपने `अनुशासित वैâडर’ पर गर्व करती है। जबकि सूरत में जहां वरिष्ठ भाजपा नेताओं के खिलाफ असंतोष के चलते चिट्ठियां पोस्ट की गर्इं थीं, अभी तक शांत नहीं हुआ है। जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था उस राजकोट में गुटबाजी ने कविता और चिट्ठियों का रूप ले लिया है। शहर अध्यक्ष मुकेश दोशी की नियुक्ति के चार महीने बाद भी, उनकी पोस्टिंग के कड़े विरोध के बाद, पार्टी ने राजकोट पार्टी में विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की नियुक्तियों को रोक दिया है। दूसरी ओर पार्टी के कद्दावर नेता जयेश रादडिया के विरोधी नेताओं ने सहकारी बैंक में नियुक्तियों पर सवाल उठाया है। खासकर जहां रादडिया परिवार के प्रभाव क्षेत्र में उनके विरोधियों ने बहुमत हासिल कर लिया है। उन्होंने उनके द्वारा की गई नियुक्तियों को अदालत में चुनौती दी है। जबकि सूरत में आंतरिक नूरा कुश्ती को सूरत पुलिस की अपराध शाखा ने शांत कर दिया था। यह देखना बाकी है कि राजकोट की स्थिति से पार्टी वैâसे निपटेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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