मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी: सोमन्ना हमलावर, किला बचाने की चुनौती, केसीआर नेता विपक्ष

झांकी: सोमन्ना हमलावर, किला बचाने की चुनौती, केसीआर नेता विपक्ष

अजय भट्टाचार्य

सोमन्ना हमलावर

एक तरफ कर्नाटक भाजपा अपनी ओवर हालिंग में जुटी है, दूसरी तरफ येदियुरप्पा के खास सहयोगी रहे वी सोमन्ना लगातार राज्य और केंद्रीय नेतृत्व पर हमलावर हैं। आलाकमान ने उन्हें ३० नवंबर को मिलने का समय दिया था, लेकिन वे नहीं गए। सोमन्ना राज्य इकाई की अध्यक्षता के लिए लॉबिंग कर रहे थे, लेकिन येदियुरप्पा का पुत्र प्रेम उन पर भारी पड़ गया। जब सोमन्ना यह कहते हैं कि सच तो यह है कि योग्य होते हुए भी मैं एक अवसर चूक गया। मैंने गुरु के पास आकर अपना दर्द बताया है। मैं अगले दो या तीन दिनों तक इंतजार करूंगा और बोलूंगा। उन्होंने सिद्धगंगा मठ में गुरु भवन का उद्घाटन करने के बाद अपना दर्द जाहिर किया। गुरु भवन उन्होंने अपनी पत्नी शैलजा की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट के माध्यम से बनाया था। सोमन्ना ने दावा किया कि जब मठ के साथ संबंधों की बात आती है तो उनकी तुलना दूसरों (विजयेंद्र) से नहीं की जा सकती, क्योंकि उन्होंने दशकों पहले कई कार्यक्रम आयोजित किए थे। उन्होंने टिप्पणी की, `इन दिनों कुछ कुत्तों और लोमड़ियों ने (मठ के मामले में) हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि सोमन्ना विधानसभा चुनावों में अपनी हार से निराश नहीं हैं और उनका दावा है कि उनमें अभी भी १५-२० साल की राजनीति बाकी है।

किला बचाने की चुनौती

कर्नाटक भाजपा में अध्यक्ष पद पर बीवाई विजयेंद्र की नियुक्ति के बाद मची खींचतान थम नहीं रही है। लोकसभा चुनावों की दस्तक साफ सुनाई देने के बावजूद पार्टी की राज्य इकाई में समन्वय की कमी बेलगावी में चल रहे विधानसभा सत्र में साफ देखी गई है। भाजपा को इस राज्य में अपनी २५ लोकसभा सीटें बरकरार रखने की चुनौती है, जो बदली हुई परिस्थिति में कठिन नजर आ रही है। अब कर्नाटक में पदाधिकारियों की जो नई टीम गठित होगी, वह भी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। राज्य नेतृत्व को लगता है कि लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के अनुभव पर भरोसा करेंगे। ८० वर्ष के लिंगायत नेता येदियुरप्पा एक सशक्त प्रचारक हैं, जिनकी अपील से पार्टी को अपने पारंपरिक लिंगायत समर्थन आधार को बनाने में मदद मिल सकती है, जो उसकी लोकसभा सीटों को बराकरार रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, येदियुरप्पा की राजनीति उनकी पार्टी में कट्टरपंथी सोच के विपरीत, मुख्य रूप से कृषि मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। सवाल यह है कि उनका राजनीति कौशल नई टीम के साथ काम आएगा क्या? जिसके सामने अपने नए सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) के साथ समन्वय सुनिश्चित करने का काम है। २०२४ का लोकसभा चुनाव उनके बेटे और पार्टी अध्यक्ष विजयेंद्र के नेटवर्क की पहली बड़ी परीक्षा होगी।

केसीआर नेता विपक्ष

तेलंगाना में केटी रामा राव, हरीश राव या के श्रीहरि को बीआरएस विधायक दल के नेता बनाए जाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो के चंद्रशेखर राव को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। बीआरएस के कुछ वरिष्ठ विधायकों को उपनेता नियुक्त किया जा सकता है। जाहिर है इसके साथ ही केसीआर विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएंगे। बीआरएस महासचिव के केशव राव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिसमें सर्वसम्मति से केसीआर को अपना नेता चुनाा गया। चूंकि केसीआर अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। पूर्व अध्यक्ष पोचारम श्रीनिवास रेड्डी ने बीआरएसएलपी नेता के रूप में केसीआर के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका तलसानी श्रीनिवास यादव और कादियाम श्रीहरि ने समर्थन किया। इस बीच, रामाराव ने शुक्रवार को विधायक पद की शपथ नहीं ली, क्योंकि वे अस्पताल में अपने पिता की देखभाल में व्यस्त थे। इधर कल मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने यशोदा अस्पताल पहुंचकर केसीआर के स्वास्थ्य का हाल-चाल जाना और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ उनके अनुभव को तेलंगाना के हित में उपयोग करने की अपील भी की।

अन्य समाचार