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झांकी: टेटे की टेंशन, भजन का एक महीना, जमीन के लिए दंगल

अजय भट्टाचार्य

टेटे की टेंशन

ओडिशा में सुंदरगढ़ भाजपा को चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता एचएस सारंगी बीजद में शामिल हो गए हैं। उनका जाना भाजपा के लिए अच्छा संकेत नहीं है, क्योंकि अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और पार्टी की मौजूदा सुंदरगढ़ विधायक कुसुम टेटे को बीजद से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। जमीनी स्तर के संगठनकर्ता सारंगी की लंबे समय से भाजपा के जिला नेतृत्व के साथ अच्छी नहीं चल रही थी। उन्होंने मार्च २०२२ में विद्रोह कर दिया, जब भाजपा ने उनकी पत्नी निनिमा पटेल की नजरअंदाज कर दिया और उनके बजाय महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित सुंदरगढ़ नगरपालिका के अध्यक्ष के सीधे चुनाव के लिए तनया मिश्रा को नामांकित किया। सारंगी ने अपनी पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतारा था। सारंगी की पत्नी ने भाजपा और बीजेडी दोनों के वोटों में सेंध लगाई थी। पिछले दो दशकों में सारंगी विभिन्न मुद्दों पर लोगों के अधिकारों के लिए लड़कर उनसे जुड़े रहने में कामयाब रहे हैं। उन्हें भाजपा के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि २०१९ में सुंदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से बीजद उम्मीदवार और पूर्व विधायक जोगेश सिंह पर ७,३६४ वोटों के मामूली अंतर से टेटे की जीत के बाद बीजद की ताकत और बढ़ गई है। जाहिर है कि सारंगी ने टेटे की टेंशन और बढ़ा दी है।

भजन का एक महीना

भजन लाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बने एक महीना पूरा हो गया है। इस एक महीने में शर्मा खुद पर या अपने बयान पर ज्यादा ध्यान न देकर अपना काम पूरा करने में व्यस्त रहे हैं। यदि कुछ भी हो तो शर्मा ने अभी तक अपने चरित्र को उस तरह से प्रकट नहीं किया है, जैसा कि राज्य के अन्य शीर्ष राजनेताओं जैसे अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे, सचिन पायलट और राजेंद्र राठौड़ ने वर्षों और दशकों से किया है। मुख्यमंत्री बंटे ही उन्होंने पहली प्रेस कॉन्प्रâेंस तो की, लेकिन उन्होंने कोई सवाल-जवाब नहीं होने दिया। पहले दिन से ही उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में कोई असाधारण या असामान्य बयान नहीं दिया और अपना सिर नीचा रखकर प्रेस कॉन्प्रâेंस में अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार उन्मूलन, कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करना और पेपर लीक रोकना। पिछले साल भाजपा के लिए बड़े चुनावी मुद्दे थे। इस महीने भर में शर्मा ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से शिष्टाचार मुलाकात की और विभागीय समीक्षा बैठकें कीं। शायद उनमें से सबसे अधिक ध्यान देने योग्य बात उनके पूर्ववर्ती अशोक गहलोत के आवास पर हुई मुलाकात थी। कथित तौर पर आखिरी बार ऐसा १९९८ में हुआ था, जब मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत निवर्तमान मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के आवास पर गए थे, लेकिन २००३ में वसुंधरा राजे की जीत के साथ यह परंपरा स्पष्ट रूप से बंद हो गई। दिलचस्प बात यह है कि गहलोत आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास पर काबिज हैं और शर्मा, जो वर्तमान में अस्थायी आवास में रह रहे हैं। ‘मलमास’ की अवधि समाप्त होने के बाद इसमें चले जाएंगे।

जमीन के लिए दंगल

आगरा में ५० करोड़ रुपए की जमीन पर कब्जे को लेकर भाजपा के दो बड़े नेताओं में ठन गई है। फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर बीती ६ जनवरी को पीड़ित परिवार से मिले थे। इस दौरान चाहर ने कहा था कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि जमीन के बोर्ड पर पहले किसका नाम था और अब किसका है। किसी नेता का फर्ज समाज की रक्षा करना और लोगों की जरूरतों को पूरा करना होता है। मामले में दोषी व्यक्ति चाहे छोटा हो या बड़ा उसे बख्शा नहीं जाएगा। इसे लेकर अब वैâबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने पलटवार करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोधियों को क्षेत्र में काम करना चाहिए। किसी की नाक काटकर खूबसूरत बनने की कोशिश न करें, अपनी नाक बड़ी करें। दोनों नेता एक-दूसरे का नाम लिए बगैर नसीहत भरी जुबान में वार-पलटवार जरूर कर रहे हैं। आगरा के बोदला इलाके में स्थित इस विवादित जमीन की कीमत ५० करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस जमीन पर कब्जे के मामले में योगेंद्र उपाध्याय पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपाध्याय ने इस जमीन के लिए २० साल पहले करार किया था, जिसकी मियाद एक साल बाद खत्म हो जाती है, लेकिन जमीन पर विवाद का पता चला तो करार छह महीने में ही खत्म कर दिया।

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