मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : ठीकरा कहां फोड़ें

झांकी : ठीकरा कहां फोड़ें

अजय भट्टाचार्य

दिल्ली से लेकर गांधीनगर तक भाजपा की गुजरात लॉबी गुजरात में वर्षाजनित बाढ़ का ठीकरा फोड़ने के लिए बहाना तलाश रही है। नतीजा यह है कि राज्य सरकार को भरूच, नर्मदा और अन्य जिलों में बाढ़ से ठीक से नहीं निपटने के आरोपों से खुद का बचाव करने में परेशानी हो रही है। किसान, जिनके खेत बाढ़ से नष्ट हो गए,भाजपा व राज्य सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं। पहले राज्य सरकार ने इसे बादल फटने के कारण हुई बाढ़ कहा। लेकिन जब इससे बात नहीं बनी तब बाढ़ को आकस्मिक बाढ़ बताया। भरूच के लोगों का गुस्सा तब फूटा जब उन्होंने मंत्रियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित क्षेत्रों में जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि शहरी इलाकों में बाढ़ का पानी निकालने वाले गुजरात के ट्रक जी-२० शिखर सम्मेलन के कारण दिल्ली भेज दिए गए थे। देश की राजधानी में रुक-रुक कर हो रही बारिश से अधिकारी पानी की समस्या से निपटने के लिए अमदाबाद से दो कुशल डीवाटरिंग ट्रक लाए गए थे जो प्रति मिनट १० लीटर पानी निकलने में सक्षम थे। आश्चर्यचकित हैं कि क्या ये ट्रक कभी उनकी बारिश से भीगी सड़कों की शोभा बढ़ाएंगे या क्या वे केवल वीआईपी के लिए आरक्षित हैं।
यूपी फार्मूले से आस
भाजपा की गुजरात लॉबी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए दूसरी सूची जारी कर भावी निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की राजनितिक पारी समेटने का इंतजाम कर दिया है। ३९ उम्मीदवारों की दूसरी सूची में कई बड़े दिग्गजों को उम्मीदवारी देकर उत्तर प्रदेश के प्रयोग को दोहराया है। भाजपा ने २०१७ में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव बिना किसी चेहरे के लड़ा था। तब कई नेता अपने-अपने इलाके में खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बता कर जनता के सामने मैदान में थे, जिसके चलते यूपी में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। इसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने यही फार्मूला अपनाया था। अपने उम्मीदवारों की इस दूसरी सूची में भाजपा ने तीन केन्द्रीय मंत्रियों-नरेंद्र सिंह तोमर, फग्गन सिंह कुलस्ते और प्रह्लाद पटेल सहित सात सांसदों को विधानसभा चुनाव में टिकट देकर कुटनीतिक दांव खेला है। इन बड़े नामों को विधानसभा चुनाव में उतार कर हर इलाके में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार देने का संकेत दिया है। ये बड़े चेहरे आस-पास के जिलों की सीटों को भी प्रभावित करेंगे। इस सूची में अधिकांश वे सीटें हैं, जो पार्टी के खाते में नहीं थीं। शिवराज सिंह चौहान के नाम पर इस बार भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता में उदासीनता है। इसलिए जोश भरने के लिए नेतृत्व ने फिर से इस रणनीति पर भरोसा जताया है। ये भी माना जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान ने बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से अपनी सीट बदलने का अनुरोध किया है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। भाजपा की इस चाल में ग्वालियर के महाराज भी निपट गए हैं।
जनता दर्शन में दंगल
कर्नाटक में कोलार के भाजपा सांसद एस. मुनिस्वामी और बंगारपेट के कांग्रेस विधायक एसएन नारायणस्वामी के बीच रंगा मंदिर हॉल में पहले जिला स्तरीय जनता दर्शन के दौरान मंच पर बोलबचनी दंगल हो गया और हाथापाई की नौबत आ गई। कोलार में कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला प्रभारी मंत्री बैराती सुरेश कर रहे थे। कोलार एसपी एम नारायण ने तेजी से कार्रवाई की और विवाद बढ़ने से पहले मुनीस्वामी को खींच लिया। इस शर्मनाक घटना के तुरंत बाद कार्यक्रम को तुरंत बंद कर दिया गया। मंच पर नारायणस्वामी और कोलार विधायक कोथुर मंजूनाथ सुरेश के बगल में बैठे थे। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, मुनिस्वामी ने श्रीनिवासपुरा वन मुद्दे पर सुरेश को एक ज्ञापन सौंपा, और नारायणस्वामी और मंजूनाथ का जिक्र करते हुए मंत्री को बताया कि वह भूमि अतिक्रमणकारियों (भू कल्लारू इद्दरे) से घिरे हुए हैं। इससे नारायणस्वामी नाराज हो गए और उन्होंने जोरदार विरोध जताया। जल्द ही, दोनों चिल्लाने लगे और एक-दूसरे को गाली देने लगे। जब मुनीस्वामी धमकी देते हुए नारायणस्वामी की ओर बढ़े, तो एसपी ने तुरंत कार्रवाई की और उन्हें मंच से दूर खींच लिया। हलांकि, सुरेश ने उन दोनों को शांत करने की कोशिश की। बाद में मुनीस्वामी को उच्च स्तरीय जिला अधिकारियों ने शांत किया और वह मंच पर लौट आए और बैठक को संबोधित किया। मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

अन्य समाचार