मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : बांकेबिहारी दर्शन भारी!

तड़का : बांकेबिहारी दर्शन भारी!

कविता श्रीवास्तव

हनुमानजी ने लंका दहन किया था। वानर सेना ने रामसेतु बना दिया। अब सुना है कि वृंदावन में वानरों ने कूद कर एक इमारत ही गिरा दी। दरअसल, वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर के पास पिछले हफ्ते एक जर्जर इमारत गिरने से पांच लोग मौत के शिकार बन गए। लोगों ने इसे वानरों का दोष बता दिया। कुछ अर्सा पहले भी इस मंदिर के भीतर बेतहाशा भीड़ की भगदड़ में कई श्रद्धालु शिकार हुए थे। वृंदावन में यह मंदिर सबसे प्रमुख और लोकप्रिय स्थल है। वृंदावन पहुंचा प्रत्येक श्रद्धालु बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन जरूर करना चाहता है। लेकिन यह मंदिर पुरानी इमारतों और तंग गलियों के बीच स्थित है। त्योहारों और धार्मिक उत्सवों के समय यहां मंदिर के भीतर ही नहीं, बाहर गलियों में भी दम घुटने लगता है। हर गली में कंधे से कंधा सटाकर एक-दूसरे से रगड़ते हुए चलना पड़ता है। एकदम दबे हुए और रेंगने की गति से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। देश के इस अत्यंत ही लोकप्रिय मंदिर के इर्द-गिर्द खुले रास्ते, सड़कें और भीड़ प्रबंधन की व्यापक योजनाएं नहीं हैं। इस मंदिर के अहाते में पहुंच कर ऐसा लगता है जैसे सबको एक साथ झोंक दिया गया हो। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों की दशा देखते ही बनती है। लेकिन श्रद्धाभाव और आस्था से पहुंचे लोग यह सब बर्दाश्त कर लेते हैं। क्योंकि अहाते में प्रवेश करते ही बांकेबिहारीजी के दर्शन तो दूर से ही हो जाते हैं। फिर भी भगवान की झांकी के एकदम सामने पहुंचने से होड़ सी मचती है। कतार जैसी कोई व्यवस्था नहीं होने से सब एक-दूसरे को ढकेल कर ही आगे पहुंच पाते हैं। पंडे लोग भी जिनसे दक्षिणा पाते हैं, उन्हें आगे ले जाते है। बाकी लोग धक्का-मुक्की की मजबूरी झेल कर दर्शन तो कर ही लेते हैं।
वृंदावन धाम सनातन भारतीय संस्कृति के पौराणिक और धार्मिक महत्व का लोकप्रिय स्थल है। यहां उमड़े श्रद्धालुओं को संभावित हादसों से बचाने के लिए व्यवस्थाएं आवश्यक हैं। हमने देखा है कि शिर्डी के साईबाबा मंदिर, तिरुपति के बालाजी मंदिर और जम्मू के वैष्णोदेवी मंदिरों में भी रोजाना अपार श्रद्धालु दर्शन करते हैं। लेकिन कुशल प्रबंधन से वहां आराम से दर्शन हो जाता है। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन के महाकाल मंदिर और देश के अनेक मंदिरों के आस पास प्रशासन के लंबे प्रयासों के बाद खुली जगहें बन पायी हैं। वैसी ही व्यवस्था की बांकेबिहारी मंदिर को भी आवश्यकता है। वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर के पास की पुरानी इमारतें हटा कर संकरी गलियों से मुक्ति जरूरी है। क्योंकि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा के बाद लोग सीधे वृंदावन धाम ही पहुंचते हैं। वृंदावन में अनेक बड़े मंदिर और संतों-कथाकारों के आश्रम हैं। यह धाम आध्यात्मिक सैलानियों से भरा रहता है। इसलिए बांकेबिहारी मंदिर में हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इन्हें हादसों से बचाने की व्यापक व्यवस्था जरूरी है।

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