मुख्यपृष्ठनए समाचारतड़का : चुनावी फुलझड़ियां!

तड़का : चुनावी फुलझड़ियां!

कविता श्रीवास्तव

मंहगाई और बेरोजगारी की समस्या को छिपाने के लिए मोदी सरकार चुनावी रेवड़ी बांटने लगी है। इसीलिए घरेलू गैस के दाम एक ही झटके में धड़ाम् से गिराए गए हैं। दाम सीधे २०० रुपए कम किए गए हैं। बीते नौ साल में उसने ऐसा नहीं किया, लेकिन अब मन से नहीं तो मनमसोस कर ही सही पर राजनीतिक मजबूरी में सरकार को यह करना पड़ा। इसी तरह सरकारी नौकरियों में भरती लगभग बंद हो चुकी है। बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है इसीलिए मोदीजी ने अपने हाथों कुछ नियुक्ति पत्र देकर उसकी भी खानापूर्ति करने की कोशिश की है। अभी ऐसी और भी चुनावी फुलझड़ियां छोड़ी जाएंगी क्योंकि आम चुनाव जो होने हैं।
एक कांग्रेसी ने सही कहा कि यह उस दुकानदार की तरह है जो पहले खूब कीमत बढ़ाता है। फिर उसी पर छूट देकर अपना माल बेचता है। जानकारों का कहना है कि गैस के दाम अभी भी ज्यादा हैं। यह सही हो जाए तो नागरिकों को और भी कम कीमत चुकानी पड़ेगी। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने चुनाव जीतने पर ५०० रुपए में गैस सिलिंडर देने का वादा करके भाजपाइयों की अलग ही नींद उड़ा रखी है। कांग्रेस ने तो मुफ्त बिजली, पुरानी पेंशन योजना, किसानों के कर्ज माफी का वादा भी कर दिया है। कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव जीत कर अपने तमाम वादों की पूर्ति भी कर दी है। इसलिए भाजपा में खलबली मची हुई है। यह सब उसके लिए जोरदार चेतावनी है। मंहगाई को काबू में लाने के लिए सरकार तो कुछ सुन ही नहीं रही। इसीलिए कहते हैं न कि जिसके कान न खुलते हों, उसके कान ऐंठने चाहिए। अब जरा सी ऐंठन पर इतनी राहत मिली है तो आगे के लिए भी जनता को ही सोचना चाहिए। ममता दीदी ने सही कहा कि विपक्षी एकता के डर से गैस की कीमत कम हुई। शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि विपक्षी गठजोड़ ‘इंडिया’ की बैठकें चलती रहीं तो घबराकर मोदी सरकार घरेलू गैस मुफ्त भी कर देगी। घरेलू गैस की कीमतों की २०१४ से समीक्षा कीजिए तो समझ आएगा कि बीते नौ वर्षों में घरेलू गैस के नाम पर घर-घर से कितने पैसे चुकाए गए हैं। पेट की आग मिटाने के लिए भोजन चाहिए। जिस घरेलू र्इंधन की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, उसके नाम पर इतने वर्षों में कितने पैसे लूटे गए हैं। अब जाकर चुनावी बरसात करके उस आग को ठंडा करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि बंगलुरु चुनाव में पराजित होने से भाजपा सदमे में है। अब विपक्षी दलों की तगड़ी एकजुटता से भाजपा के माथे पर पसीने छूट रहे हैं। बौखलाहट इतनी है कि उनको इस गठबंधन के नाम, नेताओं की उपस्थिति, उनके नेतृत्व हर चीज से चिढ़ हो रही है और वे बेतुके बयान देने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। तभी तो ममता बनर्जी ने सही कहा कि विपक्ष की बैठक के डर से ही घरेलू गैस के दाम कम किए गए हैं। यदि यह सही है तो…आगे-आगे देखिए, होता है क्या!

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