मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : खोया-खोया चांद...कैसे नींद आएगी

तड़का : खोया-खोया चांद…कैसे नींद आएगी

कविता श्रीवास्तव

हमारा चंद्रयान -३ अपना काम पूरा करके चंदामामा की गोद में आराम की नींद फरमा रहा है। उसका लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान दोनों ही गहरी नींद में चले गए हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने उनकी आयु एक चंद्र दिवस (यानी पृथ्वी के १४ दिन) ही तय की थी। चंद्रमा पर सूर्य की किरणें जब पड़ती हैं, उजाला होता है। चंद्रमा साफ दिखाई देता है। उसका आकार बढ़ता है। वह पूर्णिमा को समाप्त होता है। हिंदुस्थानी कैलेंडर में यही चंद्र माह का शुक्ल पक्ष कहा जाता है। उसके बाद पंद्रह दिन सूर्य की किरणें चंद्रमा पर नहीं पड़ती हैं। तब अंधेरा छाया रहता है।
यही कृष्ण पक्ष है। यही एक चंद्र दिवस (हमारे १४ दिन) है। चंद्रयान-३ को हिंदुस्थानी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अपने दम पर चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतारने का कीर्तिमान बनाया। चंद्रयान ने शुक्ल पक्ष यानी एक चंद्र दिवस तक चंद्रमा पर तस्वीरें खींची। लगभग सौ मीटर तक दौरा किया। जरूरी जानकारियां जुटाईं। वे जानकारियां इसरो को मिल गई हैं। उसके बाद हमारा चंद्रयान सो गया।
लाखों कि.मी. की दूरी से उस पर सीधा नियंत्रण रखना संभव नहीं है। जब तक उसे सूरज की किरणों से ऊर्जा प्राप्त होती रही, वह जागता रहा। उसने वैज्ञानिकों की अभिलाषा और उम्मीद के अनुसार, अपना काम पूरा किया। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पहुंच कर उसने ढेर सारी नई और महत्वपूर्ण जानकारियां इसरो को भेजी हैं। इसरो इस उपलब्धि से संतुष्ट है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन चुके हैं। वहां के हवामान, जलवायु, खनिज, मिट्टी के तत्वों, पानी, रसायन आदि से संबंधित बेहद दुर्लभ जानकारियां अब हिंदुस्थानी वैज्ञानिकों ने जुटा ली हैं। इसी के आधार पर वहां मानवीय जीवन की संभावनाओं पर अध्ययन जारी है। अभी भी आशा की जा रही थी कि संभवत: अगले कुछ दिनों बाद पुन: सूर्य की किरणों के संपर्क में आने के बाद विक्रम या प्रज्ञान एक बार फिर जाग जाएं और सक्रिय हो सकें। वे पुन: सक्रिय हुए होते तो कुछ और जानकारियां मिल जातीं।
लेकिन वे दोनों फिर से नहीं जाग सके हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों को किसी चमत्कार की अभी भी उम्मीद है। विक्रम और प्रज्ञान पुन: जाग जाएं तो यह उनकी आयु का बोनस ही होगा। हालांकि, चंद्रयान-३ अपना निर्धारित काम पूरा करके अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हिंदुस्थान का झंडा दुनिया में सबसे ऊपर लहरा चुका है। हम चांद पर पहुंच चुके हैं, लेकिन चांद पर अभी बहुत से शोध होने बाकी हैं। आगे के लिए हमारे वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हम सूर्य, मंगल व अन्य ग्रहों के करीब पहुंचने को बेताब हैं। जब तक उपलब्धि नहीं मिलेगी, हमारे वैज्ञानिक चैन की नींद नहीं सो पाएंगे। चंद्रयान भले सो जाए। इस मौके पर देव आनंद साहब पर फिल्माया रफी साहब का गाना याद आता है….
खोया-खोया चांद खुला आसमान
आंखों में सारी रात जाएगी
तुमको भी कैसे नींद आएगी।

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