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तड़का: मांझे की चपेट चल…लपेट!

कविता श्रीवास्तव

इस मकर संक्रांति पर नायलॉन और चाइनीज मांझे की चपेट में आने से कई लोगों की मौत हो गई। पुलिस और प्रशासन ने ऐसे मांझों को प्रतिबंधित किया था, लेकिन लोग नहीं माने। ऐसे जानलेवा मांझे बाजार में आए, बिके और खरीदने वालों ने उनसे पतंगबाजी की। पर उनकी चपेट में आने से त्योहार की उमंग ने कई घरों में मातम पैâला दिया। मकर संक्रांति सूर्य को समर्पित त्योहार है। इसे सूर्य की उपासना का महापर्व कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान की परंपरा है। जब सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। शनि अपने पिता सूर्य को शत्रु मानते हैं, लेकिन मकर संक्रांति पर सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके घर जाते हैं। मकर संक्रांति के साथ ही खरमास की समाप्ति होती है। इस दिन से सूर्यदेव अपने तेज के साथ चलना शुरू करते हैं इसलिए ठंड खत्म होकर गर्मी बढ़ने लगती है। मकर संक्रांति इस बार सोमवार को थी जो भगवान शिव का दिन है इसलिए यह दिन देवों के देव महादेव को समर्पित रहा। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव एवं माता पार्वती की विशेष पूजा भी अनेक स्थानों पर हुई। हर जगह पूजा, पाठ, अनुष्ठान, उत्सव कुछ ज्यादा ही देखा गया क्योंकि इस समय पूरा देश भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर जबरदस्त उत्साह में है। लेकिन इसी जोश में पतंगबाजों के खतरनाक मांझों ने दु:खी भी किया। इस मकर संक्रांति के मौके पर चीनी मांझे की चपेट में आकर गुजरात में चार लोगों की मौत हुई। मध्य प्रदेश में एक बच्चा शिकार बन गया। हैदराबाद में सेना के एक सिपाही की मौत हो गई। मुंबई में कई लोग घायल हो गए। कितने पशु-पक्षी इन मांझों का शिकार बने, इसका कोई अंदाजा ही नहीं है। इस मामले में मुंबई में पुलिस ने तो कई जगह छापेमारी की और ५१ केस दर्ज किए। मुंबई पुलिस ने पहले चीनी और नायलॉन मांझे को प्रतिबंधित किया था। इससे पहले भी मुंबई में एक पुलिस सिपाही की गर्दन में मांझा फंसने से उसकी मौत हो गई थी। कुछ अर्से पहले नासिक में भी एक महिला की मौत हो गई थी। चिंता यह है कि ये जानलेवा होते जा रहे नायलॉन और चीनी मांझे बनने ही क्यों दिए जाते हैं? चीनी मांझे लाता कौन है? वे आते ही क्यों हैं? उनकी बिक्री करने वालों, उनको बनाने वालों और उन्हें सप्लाई करने वालों के खिलाफ धर-पकड़ अभियान बहुत जरूरी है। इन्हें न खरीदने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान अब जरूरी है। इस पर सख्ती भी आवश्यक है। मकर संक्रांति या कोई भी पर्व हमें उत्साह मनाने, खुश होने के लिए होते हैं, लेकिन कोई इससे शोकग्रस्त हो जाए और उसका कारण पतंग उड़ाने का एक धागा (मांझा) हो तो कितनी दुखदाई बात है।

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