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तड़का : आसां नहीं दूसरों का बोझ उठाना…

कविता श्रीवास्तव

कांग्रेस नेता राहुल गांधी नई दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन पर कुलियों से मिलने पहुंचे तो लाल शर्ट पहन कर खुद भी कुली (भार उठाने वाले श्रमिक) बन गए। उनका यह रूप खूब चर्चा में आया। केवल कुली ही नहीं, हर श्रमिक उनके इस अपनत्वभरे भाव से खुश हो गया।
‘कुली….!’ यह सुनते ही १९८२ में अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘कुली’ की याद ताजा हो जाती है। उस फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को चोट लग गई थी और पूरे देश ने उनके स्वस्थ होने की दुआएं मांगी थी। उन दुआओं का ही असर था जो बिग बी स्वस्थ हो गए। उस फिल्म में एक गाना था, ‘सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं…।’ यह गाना वास्तव में कुलियों की मनोदशा व्यक्त करता है। इन्हीं बोझ उठाने वालों से मिलकर राहुल गांधी ने उनका हाल-समाचार जाना। कुलियों के आग्रह पर उनका गणवेश पहना और सिर पर बोझा भी उठाया। यह बहुत ही सामान्य सी बात है। लेकिन राहुल गांधी जैसे राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष नेता का ऐसा करना कोई साधारण बात नहीं है।
ऐसा करने के लिए बहुत ही गहरी मानवीय संवेदना और वास्तविक अपनेपन का भाव होना चाहिए। बहुत बड़ा दिल होना चाहिए। उसके लिए सीने का साइज ५६ इंच हो यह जरूरी नहीं। उसमें लोगों का दर्द समझने की इच्छा होनी चाहिए। ऐसा करने पर कपड़े की क्रीज टाइट नहीं रहती। बल्कि पसीने से तरबतर हो जाती है। यह सैकड़ों वैâमरों की कवरेज में व्यक्तित्व का प्रभाव दिखाने का प्रायोजित इवेंट नहीं, भारत जोड़ने के साहसिक अभियान का जमीनी प्रयास है। यह किसी शो की तरह अकेले हाथ हिलाते व्यक्ति की नहीं, आम आदमी की तरह उनके साथ चलने की मानवीयता का प्रमाण है। केवल औद्योगिक घरानों की खुशामद करने वालों को ऐसे कुलियों की कोई फिक्र नहीं होती। कोई उच्च शिक्षित युवा उचित रोजगार के अभाव में बोझ उठा रहा है, यह बात राहुल गांधी से उसकी मुलाकात में सामने आई। ये श्रमिक आम आदमी के सहायक होते हैं। हर अंजान मुसाफिर की मदद करते हैं। वे सबका बोझ अपने सिर-कंधों पर उठाकर गंतव्य तक पहुंचाते हैं।
दूसरों का बोझ उठाना इतना आसान काम नहीं है, जितना दिखता है। देश के गरीबों, किसानों, मजदूरों, युवाओं आदि के सिर पर समस्याओं का जो बोझ है, राजनेता उसे कम करने के उपाय कब करेंगे? मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, द्वेषपूर्ण राजनीति, भेदभाव, निरंकुश नीतियां जैसी समस्याएं आम जनता पर भारी बोझ हैं। ये बोझ नागरिकों की कमर तोड़ रहे हैं। इसके लिए अकेले राहुल गांधी ही नहीं, हर जनप्रतिनिधि को कुली की भूमिका निभानी होगी।

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