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सेहत का तड़का : आधा पेट भोजन, भरपेट पानी! सयानी गुप्ता की सेहत का राज

एस.पी.यादव

मॉडल व अभिनेत्री सयानी गुप्ता का जन्म ९ अक्टूबर १९८५ को कोलकाता में हुआ। जिम जाकर पसीना बहाने और किसी विशेष डाइट चार्ट को फॉलो करने में यकीन न करनेवाली सयानी गुप्ता का मानना है कि हर व्यक्ति की फिटनेस का पैमाना अलग-अलग होता है। आधा पेट खाना और भरपेट पानी पीना स्वस्थ रहने की पहली शर्त है। संतुलित रहन-सहन ही फिटनेस का मूल-मंत्र है।

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से ग्रेजुएट सयानी गुप्ता ने २०१२ में फिल्म ‘सेकेंड मैरिज डॉट कॉम’ से बॉलीवुड में पदार्पण किया। उन्होंने ‘फैन ’, ‘जॉली एलएलबी-२’ और ‘आर्टिकल-१५’ जैसी बड़ी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी। उन्होंने कई वेब सीरीज में भी उल्लेखनीय काम किया है।
सयानी गुप्ता को जिम जाकर व्यायाम करना पसंद नहीं है। वे सप्ताह में तीन दिन अपने पर्सनल ट्रेनर की निगरानी में घर पर ही लगभग एक घंटे व्यायाम करती हैं। उन्हें वेट ट्रेनिंग और कार्डियो एक्सरसाइज करना पसंद है। वे सप्ताह में तीन-चार दिन योग अभ्यास करती हैं। हालांकि प्रतिदिन सुबह लगभग पौना घंटा तेज चलने और जॉगिंग करना नहीं भूलती हैं।
डाइट चार्ट में यकीन नहीं
सयानी गुप्ता किसी विशेष डाइट चार्ट में यकीन नहीं करती हैं। वे बेहिचक अपनी पसंद का भोजन करती हैं। चॉकलेट और मिठाइयां खाती हैं लेकिन उनका कहना है कि हमें जितनी भूख लगी हो, उससे कुछ कम खाना खाना चाहिए, ताकि पाचन में कोई दिक्कत न हो।
आंवले का रस और गुनगुना पानी
सयानी गुप्ता सुबह खाली पेट तीन-चार गिलास गुनगुना पानी और आंवले का रस पीती हैं। कभी-कभार नाश्ते में उबले अंडे, ताजे फल, सेरल्स या ओटमिल लेती हैं। हालांकि वे नाश्ता करने की बजाय ब्रंच (नाश्ते और दोपहर के खाने के मिश्रण के रूप में देर सुबह खाया जानेवाला भोजन) लेना पसंद करती हैं। सयानी का कहना है कि अच्छा नाश्ता वही होता है, जिसे खाने के बाद एसिडिटी की समस्या न हो। वे ११-१२ बजे के बीच ब्रंच लेती हैं।
सात बजे से पहले डिनर
सयानी दोपहर के भोजन में दाल, चावल, उबली सब्जियां, कभी-कभी मछली या चिकन लेती हैं। उनके रात के भोजन में भी लगभग यही सब होता है। आम बंगालियों की तरह सयानी को भी रोटी पसंद नहीं है। वे चावल खाना पसंद करती हैं। हालांकि कभी-कभी हफ्ते-दो हफ्ते चावल की जगह क्विनो खाती हैं। वे शाम सात बजे तक डिनर कर लेती हैं। प्रतिदिन आठ घंटे नींद लेती हैं।
सयानी का कहना है, ‘जो मन को अच्छा लगे वो खाएं। आपके पुरखे जैसा भोजन करते रहे हैं, वैसे भोजन को तवज्जों दें, क्योंकि आपके निर्माण में ऐसे भोजन की ही भूमिका होती है। छोटी-छोटी खुराकों में उतना खाएं, जितना पचा सकें। संतुलित दिनचर्या ही आपको सही मायने में फिट रख सकती है।’
सयानी को पारंपरिक बंगाली व्यंजन मसलन, कोशा मांसो (मसाले में पका मांस), आलू पॉटोलर झोल (आलू-लौकी की सब्जी), लपटवां आलू और खीर बेहद पसंद है। उन्हें जापानी व्यंजन सुशी भी भाता है। नींबूवाली चाय और कॉफी पीना विशेष पसंद है। फलों में आम, अंगूर और तरबूज पसंद हैं।
लपटवां आलू की रेसिपी
सामग्री : पाव किलो आलू, एक-दो प्याज, एक-एक चम्मच हल्दी, जीरा, धनिया, लाल मिर्च, गरम मसाला और अमचूर पाउडर, आधा-आधा चम्मच राई, मेथी और अजवायन, ५० ग्राम मटर के दाने, १५ ग्राम पिसे मखाने, १०० ग्राम टमाटर का रस, १० ग्राम खसखस, एक चुटकी हींग, एक चुटकी काला नमक, आठ-दस लौंग, एक छोटी कटोरी दही, तीन-चार चम्मच घी, बारीक कटा हरा धनिया और स्वादानुसार नमक।
विधि: आलू को उबालकर छील लें। उसे चार-चार फांकों में काट लें। चौथाई भाग को मथ लें। पैन में घी गर्म करके हींग, जीरा, प्याज, राई, मेथी और अजवायन डालकर छौंक तैयार कर लें। मथे आलुओं को छौंक में डाल दें। नमक, हल्दी और गरम मसाला डालकर अच्छी तरह मिलाएं। थोड़ा-सा पानी डालकर घोल को हल्का रसीला बना लें। इसमें आलू की फांकें डाल दें। उबाल आने पर इसमें दही, अमचूर पाउडर, गरम मसाला और हरा धनिया डालें। पांच-सात मिनट पकाने के बाद परोसें।
फायदे: इसमें पर्याप्त मात्रा में वैâल्शियम, आयरन, विटामिन-बी और फास्फोरस होता है। यह हड्डियों को मजबूती देने, शरीर को झटपट एनर्जी देने और त्वचा में निखार लाने में सहायक है। रक्तपित्त और अम्लपित्त को रोकने में कारगर है। इसमें पाया जानेवाला पर्याप्त प्रोटीन बुजुर्गों के शरीर की कमजोरी दूर करता है। वजन को नियंत्रित रखता है।

(लेखक स्वास्थ्य विषयों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार व अनुवादक हैं। ‘स्वास्थ्य सुख’ मासिक के संपादक रह चुके हैं।)

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