मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : रोम-रोम में ‘राम'

तड़का : रोम-रोम में ‘राम’

कविता श्रीवास्तव

आज सारे विश्व की निगाहें अवध की ओर हैं। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर वह हो रहा है जिसकी हिंदू धर्मानुयायी और सनातनी पिछली पांच सदी से प्रतीक्षा कर रहे थे। श्री रामलला एक बार पुन: वहीं स्थापित हो रहे हैं जहां उनका जन्म हुआ था। अपराह्न अभिजीत मुहूर्त में जैसे ही भगवान श्री राम की प्राण-प्रतिष्ठा की विधि पूरी होगी, समूचे जगत के सनातनियों की आंखें भर आएंगी। सरयू तट पर उत्सवों की जो धूम मची है, उतनी ही पूरे देश के गली-मोहल्लों में भी है।
भव्यता से सजे अयोध्या धाम में आज आवाहन, आसन, पाध्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंधाक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल दक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि और प्रदक्षिणा करके षोडशोपचार पूजन की विधि संपन्न होगी और भगवान प्रकट हो जाएंगे। बहुप्रतिक्षित मंदिर दर्शन के लिए खुल जाएगा। यही दृश्य देखने के लिए कई पीढ़ियां संघर्ष करते-करते समाप्त हो गर्इं। हमारे पूर्व की ११-१२ पीढ़ियां यह मंदिर देखने के लिए तरस गर्इं, लेकिन वर्तमान युग में हम सबको यह सौभाग्य मिला है कि हम कलयुग के आरंभिक दौर में रामराज्य की कल्पना को साकार होते देख रहे हैं। त्रेता युग में विष्णु के अवतार प्रभु श्री रामचंद्र जी आए थे और लगभग ११ हजार वर्ष रामराज्य रहा। फिर द्वापर युग आया और पूरा हुआ। कलयुग अभी शुरू हुआ है और भगवान ने एक बार पुन: अपना चमत्कार दिखाया है। कहते हैं, भगवान कभी कमजोर नहीं होते। वे सर्वशक्तिमान हैं। लेकिन समय-समय पर भक्तों की परीक्षाएं लेते हैं। जब भक्ति बढ़ी तो मंदिर का सपना साकार हुआ। मुगल आक्रांताओं ने हिंदू धर्म को अपमानित करने के लिए इस मंदिर पर मस्जिद खड़ा किया था, लेकिन लगभग साढ़े पांच सौ वर्षों बाद एक बार पुन: गाया जा रहा है कि ‘राम आएंगे।’ आज देश भर में मंगल गीत गाए जा रहे हैं। हर मंदिर मंदिर, हर घर में प्रभु श्री राम का स्मरण कर भजन, कीर्तन, अनुष्ठान किए जा रहे हैं। दीप जलाए जा रहे हैं। भोजन कराए जा रहे हैं। हर दिल में उत्साह है। उमंग है। भगवान राम हर सनातनी के हृदय में निवास करते हैं। पीढ़ियां आती रहेंगी लेकिन रोम-रोम में बसा राम नाम हमारा आदर्श बना रहेगा। अखंड ब्रह्मांड महानायक मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीरामचंद्र जी के चरणों की रज जगत का कल्याण करे। यही कामना।
तुलसीदास ने लिखा है-
राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास।
सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास।
तुलसीदास जी यही मांगते हैं कि मेरा एक मात्र राम पर ही भरोसा रहे, राम ही का बल रहे और जिसके स्मरण मात्र ही से शुभ, मंगल और कुशल की प्राप्ति होती है, उस राम नाम में ही विश्वास रहे।

अन्य समाचार