मुख्यपृष्ठनए समाचारतड़का : विज्ञान भी कर रहा अध्यात्म की खोज!

तड़का : विज्ञान भी कर रहा अध्यात्म की खोज!

कविता श्रीवास्तव

हिंदुस्थान के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-३ को चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतारने का कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। उन्हें बधाई देने और उनका आभार मानने प्रधानमंत्री स्वयं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कार्यालय पहुंचे, लेकिन जैसे ही फुर्सत मिली इसरो के चेयरमैन एस.सोमनाथ सीधे तिरुअनंतपुरम पहुंचे। उन्होंने सुप्रसिद्ध पूर्णमिकावु भद्रकाली देवी के दर्शन किए और उनसे आशीर्वाद लिया। उनकी इस धार्मिक आध्यात्मिक यात्रा की खूब मीडिया कवरेज भी हुई। अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि वे एक शोध वैज्ञानिक हैं। विज्ञान के साथ आध्यात्मिक शोध पर भी ध्यान देते हैं। सोमनाथ ने कहा कि विज्ञान और आध्यात्मिकता दोनों की खोज करना उनके जीवन की यात्रा का एक हिस्सा है। इसलिए वे कई मंदिरों में जाते हैं और कई धर्मग्रंथ पढ़ते हैं। इस ब्रह्मांड में हमारे अस्तित्व और हमारी यात्रा का अर्थ खोजने का प्रयास ही उनका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति का एक हिस्सा है, जिसे हमने सभी आंतरिक और बाहरी चीजों का पता लगाने के लिए बनाए हैं। उन्होंने कहा कि मैं बाहरी दुनिया के लिए विज्ञान का प्रयोग करता हूं और आंतरिक आत्मा की संतुष्टि के लिए मंदिरों में जाता हूं।
अंतरिक्ष की दुनिया को अचंभित करने का कारनामा करने के बाद सोमनाथ जब आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं तो यह समझ में आता है ज्ञान-विज्ञान और अंतरिक्ष से ऊपर भी कोई शक्ति है। यह आध्यात्मिक शक्ति ही सर्वशक्तिमान है, क्योंकि हमने पृथ्वी को जान लिया। अब हम चंद्रमा को जानेंगे। हम मंगल, शुक्र, सूर्य के बारे में भी जानने लगे हैं, लेकिन पूरे ब्रह्मांड को एक समयसारिणी के अनुसार, कौन सी शक्ति संचालित कर रही है, यह हम नहीं जानते? सूरज निश्चित समय पर उदय होकर निश्चित समय पर अस्त हो जाता है। चंद्रमा पर १४ दिनों बाध अंधेरा क्यों हो जाता है, फिर १४ दिन बाद उजाला हो जाता है? तय समय पर तापमान का गिरना और उसका पुन: पूर्ववत हो जाना वैâसा रहस्य है? पूरे ब्रह्मांड और सौरमंडल में विभिन्न ग्रह किसके नियंत्रण में निश्चित समयानुसार परिक्रमा करते हैं? एक-दूसरे से टकराते क्यों नहीं? धरती पर वर्षा के बाद शीत ऋतु का होना, फिर गर्मी और पुन: वर्षा यह सब विज्ञान के नियंत्रण में नहीं है। फिर इन सारी गतिविधियों का संचालन कौन करता है? इसी प्रकार मनुष्य का जन्म लेना और फिर उसका समाप्त हो जाना भी विज्ञान के नियंत्रण में नहीं है। कोई विज्ञान किसी मनुष्य की मौत को रोक ले ऐसा उपाय ही नहीं है इसीलिए हम सब प्रकृति के दास हैं। मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे और सभी धार्मिक स्थल इस आध्यात्मिक शक्ति के प्रति आस्था रखते हैं। विज्ञान हमारे भौतिक जीवन की आवश्यकता है, लेकिन अध्यात्म हमारी आंतरिक शक्ति का स्त्रोत है।

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