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तड़का: मतों की बौछार के लिए सचिन

कविता श्रीवास्तव

क्रिकेट के मैदान पर रनों की बौछार लगानेवाले सचिन तेंदुलकर ने अब मतों की बौछार लगाने का जिम्मा उठाया है। निर्वाचन आयोग ने उन्हें अपना `आइकन’ नियुक्त किया है। देश के चुनावों में वे मतदान का स्कोर बढ़ाएंगे। वे युवाओं सहित सभी मतदाताओं को चुनावों के वक्त अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे। क्योंकि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोटों का ही महत्व है। फिर भी हर नागरिक मतदान में भाग नहीं लेता है। ढेर सारे लोग चुनावों में कोई रूचि नहीं रखते। कई तटस्थ होते है इसलिए मतदान नहीं करते। कुछ लोग इतने निष्ठुर होते हैं कि उन्हें मतदान से कोई मतलब ही नहीं रहता। अपना प्रतिनिधि चुनने में हम बड़े आलसी हैं। जबकि ये जनप्रतिनिधि ही हमारी सरकार बनाते हैं। उसी सरकार के फैसले, उसकी नीतियां और उसके सिद्धांतों का असर हम सब पर पड़ता ही है। तब हम सरकार को कोसते हैं। सरकारें चुनावी नतीजों के आधार पर ही बनती हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों की नीतियां और उनकी योजनाएं समझकर ही मतदाता यह तय करता है कि सत्ता में किसे लाना है और किसे हटाना है। लेकिन हमारे चुनावी रिकॉर्ड बताते हैं कि देश के कई इलाकों में बहुत ही कम लोग अपने घरों से निकल कर पोलिंग बूथ तक पहुंचते हैं। इसीलिए कई बार उनके नाम पर फर्जीवाड़ा करके मतदान करने के मामले हम सुनते हैं। मतदाताओं की उदासीनता के कारण ही कई पोलिंग बूथ पर जबरन कब्जा हो जाता है। ढेर सारे लोगों के मतदान न करने पर भी निर्वाचन प्रक्रिया तो पूरी हो जाती है। अक्सर बहुत ही कम अंतर से चुनावी हार-जीत भी होती है। बाद में लोग चुने हुए जनप्रतिनिधियों और सरकारों को कोसते फिरते हैं। निर्वाचन आयोग चाहता है कि देश में शत-प्रतिशत लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करें। इसके लिए जनजागरण अभियान, कार्यशालाएं, विज्ञापन व अन्य प्रकार के संसाधनों से सबको मतदान के लिए प्रेरित किया जाता है। सचिन तेंदुलकर जैसे क्रिकेट के सितारे को निर्वाचन आयोग का `आइकन’ बनाना एक अच्छी पहल है। क्योंकि यदि हर मतदाता यही सोचे कि उसके एक मतदान से क्या होगा, तो यह भी समझना चाहिए कि देश का हर व्यक्ति एक ही वोट देता है। वही वोट इकट्ठा होकर हमारे देश की सरकार बनाने का काम करते हैं। यदि इससे कोई व्यक्ति चूक जाता है तो समस्त नागरिकों का जनप्रतिनिधित्व नहीं हो पाता है। सीमित लोगों के मतदान से मात्र कुछ प्रतिशत वोट पाकर भी लोग चुन लिए जाते हैं। यदि सभी लोग मतदान करें और शत-प्रतिशत मतदान हो तब जाकर पूरे देशवासियों की एकमुश्त राय निर्वाचन के रूप में सामने दिखेगी। इस चुनौतीपूर्ण काम को सचिन तेंदुलकर ने अपने हाथों में लिया है। उन्होंने जिस प्रकार क्रिकेट के मैदान पर शतक पर शतक लगाकर रिकॉर्ड बनाए हैं, उसी तरह उम्मीद है कि शत प्रतिशत वोट दिलाकर भी वे रिकॉर्ड बनाएंगे। क्योंकि हमारा वोट केवल चुनाव के लिए नहीं है। वह तो लोकतंत्र का ब्रह्मास्त्र है उसे चलाना चाहिए।

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