मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का: बंद करो अपराध जेल में जगह नहीं

तड़का: बंद करो अपराध जेल में जगह नहीं

कविता श्रीवास्तव

महाराष्ट्र की कई जेलों में कैदियों को रखने की जगह कम पड़ रही है। जेलों की निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक, लगभग दो गुना कैदी जेलों में पहुंच रहे हैं। हालात ये हैं कि कैदियों को जेलों के बरामदों में ही सुलाया जा रहा है। इसी बीच राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उसमें अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है। उसमें भी अपनी मुंबई अपराध के मामलों में देश में दूसरे नंबर का शहर है। दूसरे कई अपराधों में महाराष्ट्र राज्य अन्य राज्यों से आगे है। बाल शोषण के सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र में दर्ज हुए हैं। भ्रष्टाचार के दर्ज मामलों में महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों पर अपराध और आत्महत्या के मामले भी महाराष्ट्र में बढ़े हैं। इसका यह मतलब नहीं कि अकेले महाराष्ट्र में ही बहुत अपराध हो रहे हैं। इन आंकड़ों का एक सच यह भी है कि महाराष्ट्र में अपराध के खिलाफ शिकायतों के लिए जागरूकता है। विभिन्न प्रकार के हेल्पलाइन नंबर और ऐप्स के जरिए लोगों को अपनी शिकायतें दर्ज करने की सुलभता है। संभव है कि अन्य राज्यों में अपराध होने पर इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज नहीं भी कराई जाती हों और मामले दब जाते हों। खैर, जब मामला आता है तो गिरफ्तारियां भी होती हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र में कैदियों को रखने के लिए ६० कारागार हैं। इन बंदीगृहों में लगभग २४,७०० कैदियों को रखने की क्षमता है, जबकि अधिकृत जानकारी के अनुसार, इस साल के आरंभ में ही राज्य में लगभग ४१,००० से अधिक कैदी विभिन्न जेलों में बंद थे। मुंबई के एकमात्र आर्थर रोड जेल की क्षमता ८०० कैदियों की है, लेकिन उसमें चार गुना अधिक कैदियों को रखने की मजबूरी होती है, इसीलिए यहां के कैदियों को तलोजा या थाने जेल में भेजा जाता है। इस समस्या के निराकरण के लिए महाराष्ट्र शासन ने लगभग ६०० करोड़ रुपए खर्च करके पालघर और नगर जिलों में नई जेलें बनाने की तैयारी की है। लेकिन इनमें भी पालघर में १,५०० और नगर में ५०० कैदी रखे जा सकेंगे। सरकार हर योजना अनुमान के हिसाब से बनाती है। लेकिन कैदियों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसलिए चिंता यही है कि आखिर अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? अपराध की गतिविधियों पर नियंत्रण क्यों नहीं हो रहा है? हालांकि जनसंख्या बढ़ने के साथ ही हर तरह की गतिविधियां बढ़ती हैं, लेकिन बढ़ती आपराधिक गतिविधियां कानून-व्यवस्था का सवाल भी उठाती हैं? अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस और हमारी जांच एजेंसियां हमेशा सक्रिय रहती हैं, लेकिन हम सबका भी सामाजिक दायित्व है कि अपराध की गतिविधियों को रोकने के लिए हम सब जागरूक बनें, सक्रिय रहें और लोगों को भी प्रेरित करें।

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