मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का: एकजुट दिखता देश

तड़का: एकजुट दिखता देश

कविता श्रीवास्तव

महिला आरक्षण बिल का लोकसभा में लगभग सर्वसम्मति से पास होना न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि देश के एकमत व एकजुट होने का प्रमाण है। यह सकारात्मक सोच पर अंतर्विरोध त्याग कर आगे बढ़ने की राह बनाने का बेहतरीन उदाहरण भी है। ऐसे बहुत कम उदाहरण मिलते हैं, जब भिन्न-भिन्न विचारधाराएं व अलग-अलग राय रखने वाली पार्टियां किसी एक विषय पर एक साथ खड़ी दिखाई दें। लोकसभा में केवल असदुद्दीन ओवैसी और उनके सांसद इम्तियाज जलील को छोड़कर देश के अन्य सारे सांसदों ने एकतरफा वोट देकर महिला आरक्षण बिल को पारित किया। इस पर प्रधानमंत्री ने सभी दलों के सांसदों का आभार माना। ओवैसी चाहते तो इस ऐतिहासिक मौके पर समूचे देश के साथ खड़ा होने का कारनामा दिखा सकते थे क्योंकि उनके विरोध के बावजूद बहुमत से बहुत ज्यादा समर्थन होने के कारण यह बिल पास होना ही था। लेकिन राजनीति में उनकी अपनी फितरत है। हालांकि, सभी समुदायों ने इस बिल पर संतोष व्यक्त किया। इससे ३३ फीसदी महिलाओं का चुनाव के जरिए संसद तक पहुंचाने का सपना पूरा होगा। हालांकि, स्थानीय निकायों में अभी भी ३३ फीसदी महिलाएं जनप्रतिनिधि हैं। संसद में भी निश्चित सीटों पर महिलाएं पहुंचें, यही इस बिल का मकसद है। यह २७ साल पुराना बिल था। कांग्रेस हमेशा से ही इस बिल को पारित करा कर महिलाओं को आगे बढ़ने का प्रयत्न करती रही है। परंतु पिछले लगभग साढ़े नौ वर्षों से सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा ने इस बिल पर कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब चुनाव सिर पर है।
इसलिए भाजपा ने मौका देखकर चौका मारा है, ताकि चुनाव में वह इस विषय को भुना सके और महिलाओं को वोट के लिए आकर्षित कर सके। लेकिन उसकी इस सोच पर सोनिया गांधी का भाषण भारी पड़ा है। सोनिया गांधी ने स्पष्ट तौर पर बताया कि महिलाओं को आरक्षण देना उनके दिवंगत पति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सोच थी। संभवत: भारतीय जनता पार्टी को इस बात का अंदेशा था कि विपक्ष महिला आरक्षण बिल का श्रेय लेने से नहीं चूकेगा। क्योंकि महिला आरक्षण बिल मूलत: भाजपा का बिल नहीं है। विभिन्न प्रधानमंत्रियों के दौर में भी यह मांग जारी रही, लेकिन मोदीजी ने हाल ही में चंद्रयान की सफलता से पुलकित लोकसभा का विशेष सत्र रखवाया। लेकिन उसके विषयों पर सस्पेंस बनाए रखा। और, अचानक महिला आरक्षण बिल का प्रस्ताव सदन में रख दिया। उनके इसी सस्पेंस से स्पष्ट हो जाता है कि वे डर रहे थे कि महिला आरक्षण बिल पुराना विषय है, विपक्ष उसका पूरा श्रेय उन्हें लेने नहीं देगा। हुआ भी यही। महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस की भूमिका ने सत्ताधारी पक्ष की पोल खोल दी है। भाजपा ने इसका मोदीकरण करने का भरपूर प्रयास किया। लेकिन २७ वर्षों में पहले से ही अन्य दल इस बिल को सदन में ला चुके थे। फिर भी इस बिल पर श्रेय लेने से ज्यादा यह प्रभावित कर गया कि इस मुद्दे पर सभी दलों की एकजुटता दिखी। हिंदुस्थान एक दिखा।

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