मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : तू सुखकर्ता-दुखहर्ता गणपति की प्रतीक्षा!

तड़का : तू सुखकर्ता-दुखहर्ता गणपति की प्रतीक्षा!

कविता श्रीवास्तव

बस, कुछ दिन और…! सावन बीतते ही बाप्पा का भव्य आगमन होगा। श्रद्धालु बड़ी बेसब्री से ‘गणपति बाप्पा मोरया’ की प्रतीक्षा में हैं और तैयारियां भी जोरों पर हैं। लोग मंहगाई पर चाहे जितनी हायतौबा मचाएं लेकिन गणेशोत्सव पर खर्च में कहीं से भी कोई कमी नहीं करते। लोगों का जोश बता रहा है कि घर-घर से लेकर सार्वजनिक गणेशोत्सव के भव्य आयोजनों तक गणेशजी की चमक-दमक का खूब जलवा रहेगा। बाजारों में एक से बढ़कर एक आधुनिक किस्म की आकर्षक-मनमोहक मूर्तियां सज गई हैं। मूर्तियों के दाम भी कम नहीं हैं। इको प्रâेंडली और मिट्टी से बनी मूर्तियों के दाम पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं। विभिन्न झांकियों और डेकोरेशन की सामग्री तथा रंगबिरंगी लाइट्स भी बाजार में आ चुकी हैं। शासन-प्रशासन ने गणेशोत्सव की तैयारियों के लिए अपनी कमर कस ली है। सड़कों पर भी मंडप बनने शुरू हो गए हैं। इसी वर्ष प्लास्टर आफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों पर प्रतिबंध लगना था, लेकिन भारी दबाव के बाद इस बार छूट दी गई है। अगले वर्ष पीओपी की मूर्तियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी। रसायनयुक्त रंग भी प्रतिबंधित रहेगा। इस बार भी विसर्जन के लिए मुंबई में मनपा बड़ी संख्या में कृत्रिम तालाब बनाएगी। इसकी तैयारियां चल रही हैं। सार्वजनिक गणेशोत्सव के झूमते-गाते धमाकेदार विसर्जन जुलूस, वड़ापाव, शर्बत आदि के वितरण, स्वागत के भव्य पंडाल आदि को लेकर हर वर्ष की तरह लोग तैयार हैं। यह तय है कि गणेशोत्सव पूरी चमक-धमक के साथ मनाया जाएगा। गणपति का आगमन अगले माह होगा। गणेशजी बुद्धि के देवता हैं। प्रथम पूजनीय आराध्य हैं। वे सुखकर्ता-दुखहर्ता हैं। सार्वजनिक गणेशोत्सव सामाजिक सौहार्दता, एकता और सबको जोड़ने का एक प्रखर माध्यम भी हैं। यह उत्सव लोग जाति-पाति, धर्म के दायरे से ऊपर उठकर पूरी सामूहिकता के साथ एक साथ मनाते हैं और इसी का सभी को बेसब्री से इंतजार भी है।

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