मुख्यपृष्ठस्तंभइस्लाम की बात : देश का गौरव है संस्कृत

इस्लाम की बात : देश का गौरव है संस्कृत

सैयद सलमान
मुंबई

पांच राज्यों के संपन्न हुए चुनाव पर अब तक अलग-अलग पार्टियां मंथन कर रही हैं। हारने और जीतने के कारणों का पता लगाया जा रहा है, ताकि उसी आधार पर आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियां की जा सके। एक बात तो है, इन चुनावों में केंद्र में सत्तासीन दल ने जमकर सांप्रदायिक कार्ड खेला। ध्रुवीकरण के खेल में न उलझने की तमाम बुद्धिजीवियों और पार्टियों की नसीहत धरी की धरी रह गई। भाजपा ने तीन राज्यों को जीत कर अपने अपरोक्ष नारे, ‘बांटो और राज करो’ के नारे को सफल कर दिखाया। भाजपा खुलकर मुस्लिम विरोध पर उतर चुकी है, यह बात आईने की तरह साफ है। अपनी पार्टी के सक्रिय नेताओं को वह धीरे-धीरे और कहीं-कहीं ऐलानिया तौर पर किनारे लगा रही है। मुस्लिम नेताओं को विधानसभा और लोकसभा में सीधे भेजने से वह परहेज कर रही है। अपने मुस्लिम नेताओं के टिकट काटना, वह भी खुले आम बयान देकर, यह भाजपा का ‘नया भारत’ है। यूपी की ही तर्ज पर कई राज्यों में उसने यह फार्मूला अपनाया है। ताजा उदाहरण तो राजस्थान का ही दिया जा सकता है, जहां उसने अपने एकमात्र मुस्लिम चेहरे और टिकट के प्रबल दावेदार यूनुस खान का टिकट काट दिया। युनूस खान पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में परिवहन मंत्री थे। भाजपा ने जब उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल कर ली। अपनी जीत से उन्होंने भाजपा नेताओं के उस पैâसले को गलत ठहरा दिया, जिसके तहत उनका टिकट काट दिया गया था। दूसरी बात, उन्होंने जनता से जुड़े रहने के अपने दावे को सच कर दिखाया।
अब बात अगर इस से आगे की करें तो वह और भी रोचक और अनुकरणीय है। राजस्थान में भाजपा के बागी यूनुस खान और अलवर की रामगढ़ सीट से जीते कांग्रेस विधायक जुबैर खान ने विधायक चुने जाने के बाद संस्कृत भाषा में शपथ ली। इन दोनों ने संस्कृत में शपथ लेकर न केवल प्राचीन भाषा का सम्मान किया, बल्कि सनातन धर्म के मानने वाले तमाम बिरादरान-ए-वतन भाइयों को यह संदेश भी दिया कि लोग चाहे जितना भी भेद पैदा करने की कोशिश करें, हम एक हैं, हमारी संस्कृति एक है, हमारे विचार एक हैं। हिंदी-उर्दू में भी यह विधायक शपथ लेते तो भी किसी को कोई आपत्ति न होती, न ही कोई इस पर विचार-विमर्श या बहस करता। दरअसल भाषा और बोली दोनों आत्माभिव्यक्ति का साधन हैं, लेकिन संस्कृत में ली गई शपथ से दोनों विधायकों ने उसमें आत्मीयता का पुट जोड़ दिया। संस्कृत में शपथ लेकर यूनुस खान ने भाजपा को यह संदेश जरूर दे दिया कि प्राचीन भाषा के आप ठेकेदार नहीं हैं। कांग्रेस के जुबैर खान ने भी यह साबित किया कि उन्हें संस्कृत से प्रेम है और उनकी पार्टी को संस्कृत में शपथ लेने वाले मुस्लिम विधायक से कोई शिकायत नहीं है। भाजपा के हिंदुत्व पर भी इसी तरह का सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहिए। वह धर्म की आड़ में न केवल समाज में दुराव पैदा कर रही है, बल्कि अपने पुराने साथी दलों को भी धोखा दे रही है। यह क्रम न रोका गया तो देश में भेदभाव अपने चरम पर पहुंच जाएगा।
यूनुस और जुबैर तो मात्र प्रतीक हैं। दरअसल, भारतीय भाषाओं और कलाओं ने इस देश की एकता में विशेष रंग भरा है। अब जरा गौर कीजिए, मदरसे का नाम आते ही लोगों के मन में क्या विचार आता है? आमतौर पर उर्दू-अरबी और इस्लाम धर्म की शिक्षा से जुड़े एक स्कूल की छवि सामने आती है। लेकिन, बड़ी संख्या में मुस्लिम बुद्धिजीवियों का मानना है कि मुस्लिम समाज के विकास और समृद्धि के लिए धर्मनिरपेक्ष शिक्षा भी बहुत जरूरी है। उदहारण के लिए, उत्तर प्रदेश स्थित गोंडा जिले के वजीरगंज इलाके में एक मदरसा है गुलशन-ए-बगदाद, जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम कर रहा है। यहां न केवल मुस्लिम छात्रों को संस्कृत की शिक्षा दी जा रही है, बल्कि बड़ी संख्या में हिंदू छात्र भी उर्दू सीख व पढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं, हिंदू और मुस्लिम छात्र उर्दू और संस्कृत के अलावा फारसी, हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे विषयों में भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे कई उदाहरण देश में मौजूद हैं। बजाय ऐसी भावनाओं की हौसला अफजाई के, भाजपा भाषाई और धार्मिक भेद को बढ़ावा देने में लगी है। यूनुस और जुबैर ने एक तरह से भाजपा के घर में घुस कर, भाजपा की पिच पर खेलकर, भाजपा को बौना बनाने का काम किया है। भाजपा को जवाब सड़क पर नहीं, इसी तरह सदन में देना चाहिए। याद रहे, संस्कृत इस देश का गौरव है। धर्म, भाषा, संस्कृति इत्यादि पर भाजपा का कोई पेटेंट नहीं है। यह देश के सभी नागरिकों की संयुक्त संपत्ति और उनका अपना अधिकार है।
(लेखक मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं। देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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