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जिंदगी से बात करिए

जिंदगी से बात करना इतना जरूरी है
जैसे हर पल किसी से मुलाकात जरूरी है
तरह-तरह की जिम्मेदारियां दर्द में लेना जरूरी है
रंजोगम के मोड़ पे ठहर जाना जरूरी है
भुलाए न रास्ता कभी जंगलों की झाड़ियों के
ये जिंदगी है साहिब हौले से उतरना पड़ता है
हम राही हैं नए मौसम के, इन बंधन के
जो हर गली दर्दों से गुजरना पड़ता है
कोई धकेलता है रोज, सैर कराता है जहां
ऊबता है हर इंसान, मगर इंसानों को क्या पता
इतनी भी आसान नहीं मंजिलें मुश्किलों की,
सुखों के पेंच ही नजर आए
जिंदगी से रोज मिलिए
सीढ़ियों से उतरिए,
पूछिए और कहिए
इन दोस्तों की दोस्ती,
क्यों इतनी दूरी है?
– मनोज कुमार, गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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