मुख्यपृष्ठसमाचारटैटू का टंटा! हेपेटाइटिस का शिकार हो रहीं महिलाएं

टैटू का टंटा! हेपेटाइटिस का शिकार हो रहीं महिलाएं

  • बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के रिसर्च में हुआ खुलासा
    शरीर पर कोई शौक से तो कोई परंपरा की वजह से टैटू यानी (गोदना) गुदवाता है। खासकर महिलाओं को ससुराल में जाने के बाद गोदना गुदवाना पड़ता है। इस टैटू के टंटे से महिलाओं को बड़ी बीमारी हेपेटाइटिस का शिकार होना पड़ रहा है। यह खुलासा बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के रिसर्च में हुआ है। इस रिसर्च को गायनी विभाग की प्रो. रीता सिंह की अगुआई में पांच डॉक्टरों की टीम ने किया। टीम ने एक साल तक विभाग में इलाज कराने पहुंची गर्भवतियों पर रिसर्च किया। ज्यादातर महिलाओं को इस बीमारी का पता पहले प्रसव के दौरान चल रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग में एक जुलाई २०२० से ३० जून २०२१ तक इलाज कराने ५,६०५ गर्भवतियां पहुंचीं। इन सभी की खून की जांच कराई गई।
    जांच में ६५ गर्भवतियों में हेपेटाइटिस-बी की पुष्टि हुई। इनमें से ६२ यानी ९५.३८ फीसदी गर्भवतियों ने टैटू (गोदना) गुदवा रखा था। रिसर्च के दौरान इन हेपेटाइटिस संक्रमितों और २३० सामान्य गर्भवतियों के जीवनचर्या की तुलना भी की गई। डॉ. रीता सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में युवतियां टैटू पसंद करती हैं। पूर्वांचल के कई गांवों में यह परंपरा के रूप में शामिल है। विवाह तय होने, बालिग होने पर गोदना गुदवाया जाता है। हेपेटाइटिस संक्रमितों में ५२ फीसदी की उम्र २५ वर्ष से कम रही। गांव में गोदने वाले कलाकार मशीन में एक ही सुई से कई महिलाओं का टैटू बनाते हैं। इससे संक्रमण तेजी से फैलता  है।

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