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टीबी ने बढ़ाया टेंशन …हर रोज जा रही ५ की जान! …मुंबई में रोजाना मिल रहे औसतन १७२ नए मरीज

सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा के माध्यम से मुंबई शहर को टीबीमुक्त करने के लिए विशेष टीबीमुक्त नीति बीते एक साल से चलाई जा रही है, लेकिन मनपा की तरफ से सही तरीके से काम न किए जाने से यह नीति धरातल में जा रही है। आज स्थिति ऐसी है कि शहर में रोजाना औसतन १७२ नए मरीज मिल रहे हैं। इसके साथ ही तकरीबन पांच मरीजों की मौत भी हो रही है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में न केवल एक साल में ६३,६४४ नए मरीज मिले हैं, बल्कि २,१४७ मरीजों की मौत भी हुई है। ऐसे में अब मनपा को कठोर उपाय योजना करने की जरूरत है।
मुंबई को टीबी से मुक्त करने के लिए मनपा स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर कई उपक्रम क्रियान्वित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने २०२५ तक मुंबई को टीबीमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इस संबंध में घर-घर जांच, नए मरीजों को नि:शुल्क दवा, टीबीमुक्त मरीजों द्वारा टीबी मरीजों का मनोबल बढ़ाना जैसे आवश्यक सहायता प्रदान करने का कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है। इसके बावजूद, मनपा की ये गतिविधियां पूरी तरह से फेल हो रही हैं और नित टीबी के नए मरीज भी मिल रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि संदिग्ध मरीज टीबी को गंभीरता से नहीं लेते हैं, इसलिए उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यदि टीबी के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो वे मनपा अस्पताल से संपर्क करें। एचआईवी संक्रमित होने पर भी टीबी का संक्रमण जल्दी हो जाता है। साथ ही कुपोषित व्यक्तियों में टीबी विकसित होने का खतरा तीन गुना अधिक होता है। बता दें कि जनवरी २०२३ से अब तक मुंबई में ६३,६४४ टीबी मरीजों का पता चला है, जिनमें १०,९१३ मरीजों ने टीबी पर काबू पा लिया है। दूसरी तरफ टीबी मरीजों की विशेष देखभाल करनेवाले पांच कर्मचारी भी टीबी से संक्रमित हो गए, लेकिन इन सभी ने सफलतापूर्वक टीबी पर काबू पा लिया है।

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