मुख्यपृष्ठनए समाचारटीबी मरीज बेहाल! ...स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की कमी

टीबी मरीज बेहाल! …स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की कमी

महंगी दवाएं खरीदने को परिजन मजबूर
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा व मुंबई जिला टीबी रोग नियंत्रण संस्थान के माध्यम से प्रत्येक प्रभागों के स्वास्थ्य केंद्र में टीबी रोगियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। हालांकि, जून २०२३ से इन स्वास्थ्य केंद्रों को टीबी रोगियों के लिए आवश्यक दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं। ऐसे में मरीज और उनके परिजन मेडिकल स्टोरों से मंहगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो गए हैं, जिसका भार उनकी जेबों पर पड़ रहा है। आलम यह है कि इन्हें टीबी की दवाओं को खरीदने के लिए प्रति माह ४,००० रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों को आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। इतना ही नहीं, स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं कम होने से अक्सर स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों के बीच विवाद हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मुंबई मनपा ने साल २०२५ तक टीबी उन्मूलन के लिए अभियान चलाया है। इसके तहत मनपा प्रत्येक प्रभाग में स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से मरीजों को टीबी की दवा मुहैया करा रही है। हालांकि, जून से इन स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए आनेवाले टीबी के मरीजों को लाइनजोलीड, क्लोफाजिमिन, साइक्लोसेरीन, बीडीक्यू लेवोफ्लाक्सासिन, मोक्सीफ्लोक्सासिन जैसी आवश्यक दवाएं नहीं मिल रही हैं। जानकारी के अनुसार कुछ स्वास्थ्य केंद्रों में आपूर्ति की कमी के कारण बहुत कम दवाएं मिल रही हैं। कई केंद्रों पर दवाओं की एक्सपायरी डेट खत्म हो जाने के बावजूद ये दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं।
कर्मचारियों व मरीजों में होता है विवाद
जानकारों का कहना है कि एक्सपायर हो चुकीं दवाओं से मरीजों को ज्यादा फायदा नहीं होगा। दूसरी तरफ दवाओं की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इन दवाओं की कीमतें भी अधिक होने के कारण मरीजों को प्रति माह लगभग चार हजार रुपए का आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग स्तर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे मुंबई जिला टीबी रोग नियंत्रण संस्था के कर्मचारियों को मरीजों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल
स्थानीय स्तर पर भी जन प्रतिनिधि लगातार कर्मचारियों से दवाओं के बारे में पूछ रहे हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा दवाओं की आपूर्ति नहीं किए जाने से कर्मचारियों को भी आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। इससे सभी कर्मचारियों में भय का माहौल व्याप्त हो गया है। टीबी रोग को पूरी तरह से खत्म करने के लिए मनपा की ओर से पहल की जा रही है। हालांकि, दवाओं की आपूर्ति नहीं होने से उसमें बाधा आ रही है। इसलिए तत्काल दवाओं की पर्याप्त एवं समुचित आपूर्ति के लिए अतिरिक्त आयुक्त और कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी से पत्राचार किया गया है।
-रमाकांत बने, महासचिव, द म्युनिसिपल यूनियन

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