" /> प्यार से मुझे बताओ न!

प्यार से मुझे बताओ न!

बेटी नहीं बहू ही सही
मां मैं भी बेटी हूं तेरी,
ऐसे मुझे सताओ न
गलती जो भी हो मुझसे,
प्यार से मुझे बताओ न!
घर बाबुल का छोड़ के आई,
छोड़े खेल-खिलौने
अपना रही हूं यह घर भी मैं,
मैया हौले-हौले …
छोटी-छोटी बातों पर,
ऐसे आंख दिखाओ न
गलती जो भी हो मुझसे,
प्यार से मुझे बताओ न!
अम्मा तेरे आंगन की,
मैं तुलसी बन जाऊंगी
इस घर पर आने वाली,
हर विपदा हर जाऊंगी …
तौर-तरीके प्रेम से मम्मी,
मुझको तुम समझाओ न
गलती जो भी हो मुझसे,
प्यार से मुझे बताओ न!
आंगन हरा-भरा करूंगी,
वंश तेरा मैं बढ़ाऊंगी
सारे नए रिश्तों को आई,
प्रेम से मैं निभाऊंगी …
बस बेटी पैदा करने का,
मिथ्या दोष लगाओ न
गलती जो भी हो मुझसे,
प्यार से मुझे बताओ न !
ताने भी सुन लूंगी तेरे,
कष्ट भी सारे सह लूंगी
छत्र-छाया में तेरी अम्मा,
भूखी भी मैं रह लूंगी …
बेटी न सही पर बहू बनाकर,
मुझको तुम अपनाओ न
गलती जो भी हो मुझसे,
प्यार से मुझे बताओ न !!
-नेहा सोनी, दतिया (मध्य प्रदेश)