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वैद्यजी बताइए: कृमि कुठार रस की गोली खाएं: कृमि व्याधि से मुक्ति पाएं!

  • वैद्य हरीश सिंह

मेरा २४ वर्षीय लड़का जब कोई काम करता है तो उसे बार-बार करता है। घर का लॉक बंद करने के बाद उसे बार-बार खींच-खींच कर चेक करेगा। बार-बार साबुन से हाथ धोने के बाद हर बार रूमाल बदली करेगा। कहीं उसे कोई बीमारी तो नहीं है?
– रमेश भटनागर, नेरुल, नई मुंबई
अगर कोई व्यक्ति लॉक, पैसे, चाभी बार-बार चेक करता है या हाथ धोता है तो ये एक मानसिक व्याधि का लक्षण है। इसे ओबेसेसिव कम्पलसिव  डिसऑर्डर कहा जाता है। इसके तहत मन में फिजूल के विचार आते हैं। कुछ लोगों में तर्कहीन , आक्रामक सोच व व्यवहार देखने को मिलता है। कई बार इन व्यक्तियों की सोच नकारात्मक होकर दिमाग में किसी को मारने का भी खयाल आता है। परंतु उन्हें पता चलता है कि ऐसा करना गलत है इसलिए वे नहीं कर पाते हैं। यह व्याधि नुकसान देह तो नहीं है, परंतु व्यक्ति व घर के लोगों को परेशान कर देती है। दवाओं के उपयोग व कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी से इसमें काफी फायदा होता है। ब्राह्मी, जटामांसी, तगर, शंखपुष्पी जैसी दवाइयां इसमें उपयोगी हैं। ब्राह्मी वटी की दो-दो गोली दो बार दें। नियमित अंतराल पर काउंसलिंग करते रहना चाहिए। शिरोधारा एवं शिरोबस्ती जैसे उपक्रम काफी उपयोगी है। बिना देरी किए आप अपने लड़के का चिकित्सीय परीक्षण करवाएं।

मेरी ११ वर्षीय बेटी को बार-बार पेट में कीड़ी हो जाती है। रात में कई बार गुदा मार्ग में कुछ काटने जैसा भी अनुभव होता है। कीड़े मारने की दवा तीन-तीन महीने में देने के बावजूद तकलीफ कम नहीं हो रही है। दवा बताएं?
-उर्मिला, दहिसर
कृमि कुठार रस एक-एक गोली दिन में तीन बार दें। बिडंगारिष्ट चार-चार चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद दें। यह दवाई लगातार तीन महीने तक दें। कृमि व्याधि में दवाई लगातार लेनी चाहिए क्योंकि यह बार-बार होनेवाली बीमारी है। आयुर्वेद की चिकित्सा में जिन कारणों से कृमि की उत्पत्ति होती है उन कारणों का त्याग करने से कृमि पुन: उत्पन्न नहीं होती है। भोजन में मीठा, तला हुआ, चॉकलेट, गुड़ आदि का सेवन बंद करें। व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखें। बेटी का नाखून काटकर रखें। मल-मूत्र त्याग के बाद हाथ-पांव अवश्य धोएं। करेले का रस तीन चम्मच रोज पीने को दें। गुदा प्रदेश पर नारियल का तेल लगाएं। बिडंग यह कृमि की श्रेष्ठ दवा एवं रसायन है।

मेरी उम्र ४८ वर्ष है। मेरे दोनों पैरों के घुटने के नीचे की नसें फूलकर  मोटी होने के साथ ही नीली और काली पड़ जाती हैं। सुबह सूजन कम हो जाती है लेकिन शाम के वक्त लगता है कि नसें फट जाएंगी। औषधि एवं उपचार बताएं?
-वीर बहादुर, आंबिवली, कल्याण
आपको वेरीकोज वेन की तकलीफ है। निदान पक्का करने के लिए डॉपलर स्टडी करवाना बेहतर रहता है। वेरीकोज वेंस होने के कारण शाम को आपके पैर में दर्द होने लगता है। शिराओं की कमजोरी व रक्त का संवहन ठीक तरह से न होने के कारण यह बीमारी होती है। बहुत समय तक खड़े होकर काम करना, हाई हील के चप्पल-जूतों का प्रयोग एवं आनुवंशिक कारण इस रोग के प्रमुख कारण हैं। दोनों पैरों पर क्रेप  बैंडेज/इलास्टिक बैंडेज या स्टाकिंग  पहनना चाहिए। व्याधि पीड़ित पैरों की नसों पर रक्त चंदन का लेप लगाएं। लैप गोली का भी उपयोग काफी असरदार है। आरोग्यवर्धिनी वटी, सूक्ष्म त्रिफला टैब, कैशोर  गुगुल की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार गर्म पानी से लें। मंजिष्ठादि क्वाथ ६-६ चम्मच दो बार पानी मिलाकर भोजन के बाद लें। पेट साफ रखने के लिए त्रिफला चूर्ण एक चम्मच रात को सोते समय लें। वेरीकोज वेन की जगह पर मालिश व सेंक न करें। रात को सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगाएं, जिससे सूजन नहीं होगी। आजकल बहुत सारे चिकित्सा के विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन अब भी उपरोक्त पारंपरिक उपाय ही सर्वश्रेष्ठ है।

मैं साबूदाना वड़ा खाने का बहुत शौकीन हूं। सप्ताह में तीन से चार बार मैं इसे खाता हूं परंतु अब मुझे गैस व पित्त की तकलीफ हो रही है। साबूदाने को पचने में हल्का और सुपाच्य समझकर ही मैं इसे खा रहा था। साबूदाने की जानकारी के साथ ही गैस की दवा बताएं?
-स्वरूप रंजन, सायन, मुंबई
पूरे भारतवर्ष में साबूदाना को उपवास का खाद्य पदार्थ समझकर खाया जाता है, परंतु यह मूलरूप से भारतीय खाद्य पदार्थ नहीं है। यह पचने में भारी होता है एवं पित्त को भी बढ़ाता है। साबूदाना वड़ा को तलकर बनाया जाता है। डीप  फ्राई  खाद्य पदार्थ शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। एक साबूदाना वड़ा में १७६ कैलोरी , ८६२ मिलीग्राम सोडियम, ४ ग्राम प्रोटीन व २३ ग्राम कार्बोहाइड्रेट रहता है। साथ ही साथ  फ्राईड होने के कारण उसमें चर्बी रहती है। अत: इसे रोजाना खाना या ज्यादा खाना हितकर नहीं है। पचने में भारी होने के कारण गैस व पित्त की तकलीफ होती है, जो अभी आपको हो रही है। अविपत्तिकर चूर्ण दो चम्मच दो बार भोजन के पहले गर्म पानी के साथ लें। भोजन के बाद शंखवटी की दो-दो गोलियां गर्म पानी के साथ लें। हल्का-फुलका  व्यायाम करें। अपने को स्वस्थ रखने के लिए कम-से-कम ४ से ५ किलोमीटर रोजाना चलें।

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