मुख्यपृष्ठसंपादकीयवित्तीय-ठगों का आतंक!

वित्तीय-ठगों का आतंक!

राजनीतिक विरोधियों का आर्थिक नुुकसान कर उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले ही नेस्तनाबूद करने की मोदी-शाह ने ठानी है। इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग शुरू है। आयकर विभाग ने कांग्रेस को नोटिस थमाते हुए १,८२३ करोड़ रुपए का दंड लगाया है। लोकसभा चुनाव के मुहाने पर कांग्रेस के बैंक खाते सील कर दिए गए हैं। आयकर विभाग ने ईडी, सीबीआई की साझेदारी से यह नया उद्योग शुरू किया है। विरोधियों के हाथ में लड़ाई के लिए कोई भी साधन न रहने पाए, एकदम कमजोर और पंगु बनाकर उन्हें चुनाव मैदान में धकेलना और ऐसी विषम परिस्थिति में बाजी मारनेवाला चीटिंग का खेल भाजपा ने शुरू किया है। पिछले १० वर्षों में भाजपा ने यह बार-बार किया है। चुनाव विधानसभा का हो या लोकसभा का, विरोधियों की मदद करनेवाले मददगारों पर आयकर विभाग, ईडी के छापे पड़ने ही हैं। भाजपा ने अवैध मार्ग से अकूत धन व साधन-संपत्ति जमा की। ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग का उपयोग कर जो लूटमार की गई, उसमें से चुनावी बॉन्ड के माध्यम से साधारण तौर पर ८ हजार करोड़ रुपए अपने खाते में जमा किए। यह सब ५ से ६ वर्षों की कमाई है। कांग्रेस के खाते में कुल ३०० करोड़ भी नहीं हैं। उन्हें १,८२३ करोड़ रुपए भरने का फरमान, लेकिन ८ हजार करोड़ वाले भाजपा के सभी गुनाह माफ। टैक्स भरने के लिए जो नियम और कानून कांग्रेस पर लगाया, वही नियम भाजपा पर लगाया तो उनके पास से ४,६१७ करोड़ का दंड वसूल करना पड़ेगा, लेकिन आयकर विभाग भाजपा को नोटिस भेजने को भी तैयार नहीं। यह एक प्रकार का राजनीतिक टैक्स आतंकवाद है। कांग्रेस के साथ-साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को भी आयकर विभाग ने नोटिस भेजकर ११ करोड़ रुपए का दंड लगाया है। तृणमूल कांग्रेस को ७२ घंटों में १५ नोटिस मिले हैं। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना को भी इसी तरीके से छला जा रहा है। मोदी और भाजपा ‘४०० पार’ करने की गर्जना कर रहे हैं तब भी प्रत्यक्ष रूप से ये लोग डरे हुए हैं और सत्ता हाथ से खिसक जाने के भय से ये ऐसी कार्रवाई कर रहे हैं। कई टैक्स चोरों को भाजपा ने अपनी पार्टी में लिया। चुनावी बॉन्ड के घोटाले में लगभग १७ कंपनियां ऐसी ही हैं, भाजपा ने जिन्हें करोड़ों रुपए की टैक्स माफी देकर उसके बदले में चुनावी बॉन्ड से रकम ली है। इस अपराध की जानकारी आयकर विभाग के पास नहीं है, ऐसा कहना मूर्खता है। भाजपा ने देश में हर स्तर पर आर्थिक धांधली की है। उन धांधली के पैसों पर उनकी राजनीति शुरू है। सीएसआर फंड में भी भाजपा ने हाथ मारा है और यह आंकड़ा १,१४,४७० करोड़ का है। मनमोहन सरकार २०१३ में एक कानून लाई थी। प्रत्येक कंपनी को लाभ का २ प्रतिशत हिस्सा सीएसआर अर्थात जनकल्याण कार्य के लिए देना होगा। इस पैसे का इस्तेमाल लोगों के लिए करना था, लेकिन भाजपा ने यह पैसा उनकी निजी संस्था, खुद की प्रसिद्धि और दिखावे के लिए उपयोग किया। उनके मनचाहे ट्रस्ट संस्था, एनजीओ के खाते में यह पैसा घुमाकर दूसरे मार्ग से लिया और उन कंपनियों के मालिकों को लाभ पहुंचाया। इसमें से विदेशों में भी पैसा गया। आंगड़िया का उपयोग कर ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ हुई। लेकिन यहां न तो ‘ईडी’ घुसी और न ही तुम्हारे आयकर विभागवाले। नोटबंदी के काल में रिजर्व बैंक से ५०० के ८८,००० करोड़ रुपए के नोट गायब हो गए। नए छापे गए ये नोट रिजर्व बैंक तक पहुंचे ही नहीं। बीच में ही ये पैसे गायब हो गए। इन पैसों को क्या पैर उग आए थे? अगर यह सब सच है तो इस संदर्भ में क्या कार्रवाई हुई? ये पैसे किसके खाते में या जेब में गए? इन्हीं पैसों से कल का लोकसभा चुनाव लड़ा जानेवाला है। इस पर कोई खुलासा नहीं हुआ। भारतीय जनता पार्टी का यह पाप है। ‘देश की अर्थव्यवस्था बीमार है, लेकिन भाजपा के डॉक्टरों को चिंता नहीं है,’ ऐसा तंज अब पी. चिदंबरम ने कसा है। अर्थव्यवस्था को समझ सके, ऐसा व्यक्ति भाजपा में नहीं है। खुलकर फिजूलखर्ची और ईडी के माध्यम से लूटमार करना, यही इनका अर्थज्ञान है। भाजपा में ‘डॉक्टर’, इस संकल्पना को मान्यता नहीं है। कोरोना जैसी महामारी में दवाओं की तुलना में ताली और थाली बजाकर कोरोना भगाओ, ऐसा बतानेवाले प्रधानमंत्री हमारे देश को मिले। इनसे बीमार अर्थव्यवस्था का क्या इलाज होगा? भाजपा में डॉक्टर नहीं, मनोरोगी हैं इसलिए अर्थव्यवस्था पंगु बन गई। अर्थव्यवस्था पर संघ का प्रभाव है। अर्थात भाजपा के द्वारा शुरू लूटपाट को संघ की मान्यता है। उनका अर्थशास्त्र रामदेव बाबा पैटर्न का है। आज भी वे गोबर, गौमूत्र ऐसे अर्थतंत्रों में अटक कर देश चला रहे हैं। इसीलिए देश की आर्थिक नीति और प्रगति गड्ढे में गई है। देश में विदेशी निवेश ३१ फीसदी नीचे चला गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन उनके वित्त विभाग में घोटाले और आतंकवाद के चलते भाजपा के खाते में ८ हजार करोड़ का माल अवैध तरीके से पहुंचा, उसका क्या? इस घोटाले में वित्त मंत्री सीतारमण भी उतनी ही जिम्मेदार हैं। आयकर विभाग सीतारमण संभालती हैं। उस विभाग ने कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, तृणमूल को टैक्स वसूली का नोटिस भेजा, लेकिन गलत तरीके से ८ हजार करोड़ रुपए पानेवाली भाजपा के कार्यालय का पता सीतारमण बाई को मालूम नहीं। मोदी की तरह सीतारमण भी झूठ बोलने लगी हैं। लोकतंत्र का गला दबाने में उनका वित्त विभाग सबसे आगे है। लेकिन बाई साहेब सती-सावित्री बनकर खुद को स्वच्छ दिखाने का प्रयास कर रही हैं। भाजपा में ‘नमो’ रोगी तो थे ही, अब उनकी अवस्था मनोरोगी की तरह हो गई है। लोकसभा चुनाव व्यवस्थित होने नहीं देना है, विरोधियों की आर्थिक नाकाबंदी कर, उनके हाथ-पैर बांधकर मैदान में धकेलना और खुद पैसों के ढेर पर बैठकर चारों तरफ लुटाना, ऐसी भाजपा की विकृत नीति है। भाजपा के कार्यकाल में ‘ईमानदारी’ और ‘प्रामाणिकता’ तड़ीपार हो गए हैं। केंद्र की सरकार कल निश्चित ही बदलेगी। उस समय विरोधियों के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद करनेवाले इन वित्तीय ठगों को सबक सिखाना पड़ेगा!

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