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उद्धव ठाकरे पर युति तोड़ने का आरोप झूठा! खड़से ने खोली भाजपा की पोल

सामना संवाददाता / मुंबई
२०१९ के लोक सभा चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना के बीच राज्य में सीएम के पद को लेकर एक फॉर्मूला तय हुआ था, जिसके तहत ढाई-ढाई साल के लिए दोनों पार्टियों के सीएम बनाए जाने की बात तय हुई थी, लेकिन शिवसेना की मदद से लोक सभा और विधान सभा चुनावों में जीत हासिल करने के बाद भाजपा वादे से मुकर गई। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र में भाजपा के प्रमुख माने जानेवाले देवेंद्र फडणवीस उल्टे शिवसेना पर ही विश्वासघात का आरोप लगाने लगे। पिछले ढाई वर्षों में भाजपा के लोग छाती ठोंककर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन पीएम मोदी उनके विशेष सहयोगी अमित शाह और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित पूरी भाजपा के झूठ की पोल उनके पुराने साथी रहे एकनाथ खडसे ने खोल दी है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के सांसदों के साथ एक बैठक के दौरान आरोप लगाया था कि उद्धव ठाकरे ने भाजपा से युति तोड़ी, भाजपा ने युति नहीं तोड़ी थी। मोदी के इस आरोप पर तत्कालीन भाजपा नेता और वर्तमान में राकांपा नेता ने एकनाथ खडसे ने चुप्पी तोड़ी है। नरेंद्र मोदी ने सांसदों की बैठक में जो कहा उसमें रत्ती भर भी सत्यता नहीं है। कभी महाराष्ट्र भाजपा में नंबर एक का कद रखनेवाले खडसे ने कहा है कि एक बार फिर से लोक सभा चुनाव करीब आ रहा है। इस चुनाव को जीतने के लिए व्याकुल भाजपा, शिवसेना को चुनौती नहीं दे सकती है। इसलिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को टारगेट किया जा रहा है। खडसे ने मोदी के झूठ की पोल खोलते हुए कहा कि २०१४ में शिवसेना से युति तोड़ने का निर्णय उद्धव ठाकरे ने लिया था, यह बात प्रधानमंत्री मोदी आधी सत्य कह रहे हैं। उस समय मैं विरोधी दल नेता था।
कांग्रेस और राकांपा के विरोध में माहौल तैयार हो गया था, इसलिए भाजपा सरकार आएगी, यह हमें विश्वास था।
भाजपा में लोगों का आने का सिलसिला बढ़ गया था। ऐसे में कई लोगों को टिकट देने में परेशानी हो रही थी। तो हमारे बीच चर्चा शुरू हुई और भाजपा ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का पैâसला लिया। उसके बाद दो-ढाई महीने में भाजपा ने युति तोड़ दी। उस समय सुधीर मुनगंटीवार, देवेंद्र फडणवीस और मैं पार्टी के वरिष्ठों से चर्चा करके युति तोड़ने का निर्णय लिया था। युति तोड़ने के लिए किससे और वैâसे कहे? इस पर भी चर्चा हुई। मुझे तत्काल मुंबई बुलाया गया। फडणवीस उस समय प्रदेशाध्यक्ष थे। फडणवीस को युति तोड़ने की घोषणा करनी थी। परंतु यह उत्तरदायित्व मुझ पर सौंपा गया। उसके बाद मैंने उद्धव ठाकरे को फोन करके युति तोड़ने की बात कहीं, ऐसा खडसे ने कहा। सुभाष देसाई, अरविंद सावंत ने युति मत तोड़ो, ऐसा सुझाव दिया था। इस पर मैंने कहा था कि यह मेरा नहीं, पार्टी का निर्णय है। इसलिए नरेंद्र मोदी जो कह रहे हैं, वह असत्य कह रहे हैं, ऐसा खडसे ने कहा। उस दौरान केंद्र से निरीक्षक भी आए थे। महाराष्ट्र के भी प्रभारी थे। उन्होंने मुझसे युति तोड़ने की घोषणा करने के लिए कहा था, ऐसा नाथाभाऊ ने बताया।

 

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