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केंद्र सरकार पर फूटा आदिवासियों का गुस्सा… विनाश की बुनियाद पर नहीं चाहिए विकास!

-मछुआरों-आदिवासियों की एक ही मांग, नहीं बनने देंगे विनाशकारी बंदरगाह
हाईवे पर उतरे हजारों लोग, घंटो रहा यातायात ठप

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर

डहाणू तालुका के वाढवन में प्रस्तावित केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट वाढवन बंदरगाह परियोजना को लेकर सरकार और मछुआरे-आदिवासी अब आमने सामने हैं। गुरुवार को हजारों लोग मुंबई-अमदाबाद राष्ट्रीय महामार्ग पर उतर आए और घंटों यातायात ठप रखा। तटीय क्षेत्रों में रहनेवाले ग्रामीणों में इस बंदरगाह परियोजना के प्रति भीषण आक्रोश व्याप्त है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे किसी भी हाल में वाढवन में बंदरगाह को नहीं बनने देना चाहते हैं। लोग लगातार सरकार से इस परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। मछुआरे और आदिवासी बंदरगाह परियोजना को विनाशकारी बता उसका बीते कई वर्षों से विरोध करते आ रहे हैं।
दोपहर १२ बजे से २.३० बजे के बीच हाईवे पर चारोटी टोल प्लाजा पर सड़क नाकाबंदी की गई, इस दौरान क्षेत्र के ग्रामीणों और मछुआरों ने काले झंडे लहराए और करोड़ों रुपए के ग्रीनफील्ड बंदरगाह के खिलाफ नारे लगाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना उनकी आजीविका के लिए मौत की घंटी होगी। वे राज्य सरकार और केंद्र के साथ बातचीत करना चाहते हैं ताकि उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके। बंदरगाह का विरोध कर रहे मछुआरों का कहना है कि बंदरगाह परियोजना को पूरा करने के लिए करीब १,४४८ वर्ग हेक्टेयर में पत्थर और मिट्टी से भराव किया जाएगा, जिससे पर्यावरण के लिए गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा और करीब पांच लाख लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
हाल ही में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक कार्यक्रम में दावा किया था कि पीएम नरेंद्र मोदी इसी महीने बंदरगाह का भूमि पूजन करेंगे। इस घोषणा ने तटीय क्षेत्रों में भड़की विरोध की आग में घी का काम किया। बंदरगाह विरोधी संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि बंदरगाह के भूमि पूजन के विरोध स्वरूप मछुआरे और आदिवासी बंदरगाह की प्रतिकृति का एक प्रतीकात्मक पुतला निकालकर उसे जलाएंगे। मुंबई के कफ परेड से लेकर डहाणू के झाई तक बसे तटीय गांवों में बंदरगाह परियोजना के खिलाफ लोगों में जबरजस्त आक्रोश व्याप्त है और वह बंदरगाह के वर्चुअल शिलान्यास के खिलाफ काले झंडे दिखाएंगे।
काला झंडा लिए हजारों लोग हाईवे पर उतरे
बंदरगाह के विरोध में हजारों लोग हाईवे पर यातायात रोकने उतरे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। विरोध कर रहे लोग हाथ में काला झंडा लिए सरकार और बंदरगाह के विरोध में जमकर नारेबाजी कर रहे थे। वाढवण बंदर विरोधी संघर्ष समिती, वाढवण बंदर विरोधी युवा संघर्ष समिति, महाराष्ट्र मच्छिमार कृती समिती, नेशनल फिश वर्क फोरम, ठाणे जिल्हा मध्यवर्ती समाज संघ, ठाणे जिल्हा मच्छीमार समाज संघ, अखिल महाराष्ट्र मच्छिमार कृती समिती, समुद्र बचाव मंच, समुद्रकन्या मंच सातपाटी, कष्टकरी संघटना, भूमि सेना व आदिवासी एकता परिषद व अन्य समस्त बंदरगाह विरोधी संगठनों ने मिलकर बंदरगाह परियोजना के विरोध में करीब तीन घंटे हाइवे रोककर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
मछुआरों और आदिवासियों ने तेज किया संघर्ष
बंदरगाह परियोजना को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद मछुआरों और आदिवासियों ने बंदरगाह परियोजना के खिलाफ संघर्ष और तेज कर दिया है। ग्रामीण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ने देना चाहते हैं। उनका कहना है कि लोगों को विनाश के आधार पर विकास नहीं चाहिए। बंदरगाह विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण पाटील ने कहा कि स्थानीय लोगों कि मांग को केंद्र और राज्य सरकार को समय रहते मानकर ऐसी परियोजनाओं को बंद करना चाहिए, जो विनाश की बुनियाद पर विकास देती हों। बंदरगाह विरोधी संघर्ष समिति के सचिव वैभव वझे ने कहा कि हाइवे रोक कर परियोजना के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में करीब ५ से ६ हजार लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि विनाशकारी परियोजना लोगों पर जबरन थोपी जा रही है। इस दौरान मुंबई और गुजरात दोनों तरफ का यातायात पूरी तरह ठप रहा।

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