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यूपी में एटीएस द्वारा पांच हार्डकोर नक्सलियों की गिरफ्तारी से उड़ी पुलिस की नींद, बिहार-झारखंड बार्डर के जिलों में नए सदस्यों की भर्ती कर रचा जा रहा था षड्यंत्र!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
15 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश में बिहार व झारखंड की सीमा से जुड़े जिलों में नक्सलियों की सक्रियता की आहट ने बुल्डोजर सरकार की नींद उड़ा दी। इन क्षेत्रों में सहयोगी संगठनों की मदद से नक्सल गतिविधियों को बढ़ाने की साजिश रची जा रही थी। एटीएस ने बलिया जिले से प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की गतिविधियों को बढ़ावा देने में जुटे पांच नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। एटीएस अधिकारियों का कहना है कि इनके द्वारा सशस्त्र विद्रोह खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा था। यह ऑपरेशन राज्य के स्पेशल डीजी प्रशांत कुमार स्वयं कर रहे थे। एटीएस का दावा है कि इनके द्वारा सशस्त्र विद्रोह खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा था। एटीएस संगठन के कुछ अन्य सदस्यों की तलाश भी कर रही है। आरोपितों के पास से सात मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा साहित्य, दस्तावेज, पंपलेट, एक नाइन एमएम पिस्टल, दो कारतूस व 10 हजार रुपए बरामद हुए हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच हो रही है। आरोपितों को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।
एटीएस यूनिट ने 15 अगस्त को बलिया के सहतवार थाना क्षेत्र स्थित बसंतपुर गांव से तारा देवी, लल्लू राम, सत्य प्रकाश वर्मा, राम मूरत राजभर व विनोद साहनी को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी मूलरूप से बलिया के अलग-अलग गांव के निवासी हैं। एटीएस थाने में आरोपितों के विरुद्ध विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एटीएस ने बताया है कि सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी के प्रमुख नेता संदीप यादव उर्फ रूपेश उर्फ बड़का भैया की मृत्यु के बाद प्रमोद मिश्रा उर्फ बुढ़ऊ उर्फ डॉक्टर साहब पूर्वांचल में एडहाक कमेटी बनाकर पुरुषों व महिलाओं की भर्ती कर रहा था। प्रमोद भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी का प्रमुख नेता है। उसने बलिया निवासी संतोष वर्मा उर्फ मंतोष को संगठन सचिव बनाया था। संतोष को संगठन के विस्तार के साथ ही पूर्वांचल में सरकार विरोधी किसी आंदोलन के दौरान साजिश रचकर उसे सशस्त्र आंदोलन में बदलने का जिम्मा सौंपा गया था। कई चुने हुए लोगों को जंगलों में शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण भी दिलाया गया था। महिला दस्ते की सक्रिय सदस्य तारा देवी उर्फ मंजू उर्फ मनीषा वर्ष 2005 में नक्सलियों से जुड़ी थी और बिहार में हुई बहुचर्चित मधुबन बैंक डकैती में शामिल रही है।
तारा नक्सली गतिविधियों, पार्टी की विचारधारा के विस्तार, आर्थिक सहयोग व नए सदस्यों को जोड़ने के लिए चलाए जा रहे मास आर्गनाइजेशन अभियान से जुड़ी है। वह संगठन के सहयोगी संगठनों व अंडर ग्राउंड साथियों के साथ मिलकर गोपनीय बैठकें कर नए सदस्यों की भर्ती व उन्हें भारत सरकार के विरुद्ध भड़काकर हिंसा कराने के प्रयास में थी। वह भाकपा (माओवादी) के लिए चंदा वसूलने व हथियार जुटाने में लगी थी। उसने प्रमोद मिश्रा को बलिया में अपने घर में शरण भी दी थी। लल्लू राम वर्ष 2002 में सीपीई (माओवादी) से जुड़ा था और वर्ष 2004 में प्रतिबंधित पत्रिका जनज्वार की छपाई के मामले में जेल गया था। जेल से छूटने के बाद वह प्रमोद मिश्रा से जुड़ गया था। वह सोनभद्र में किसानों, छात्रों, मजदूरों, अनुसूचित जाति के लोगों, आदिवासियों व महिलाओं को भिड़ाकर आंदोलन से जोड़ने का काम कर रहा था। लल्लू तक प्रमोद के संदेश टोनी राजभर पहुंचाता था। पूछताछ में सामने आया है कि पकड़े गए आरोपितों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। सत्यप्रकाश पढ़ा-लिखा है। उसे किसानों के लिए एक संगठन बनाकर उसकी आड़ में बैठकें करने व लोगों के बीच पर्चों के माध्यम से नक्सली विचारधारा को बढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया था। वह हिंसक आंदोलन छेड़ने के लिए काम कर रहा था।
राम मूरत वर्ष 2005-06 से नक्सलियों से जुड़ा है। वह भाकपा (माओवादी) संगठन के शीर्ष सदस्य वाराणसी निवासी सुब्रमण्यम का संदेश वाहक था। वह नक्सलियों को शरण देने के साथ ही अपने आवास पर गोपनीय बैठकें भी करवाता था। विनोद साहनी का भाई संजय साहनी बिहार में असलहों के साथ पकड़ा गया था। वह भाई संजय का स्थान लेने के लिए काम कर रहा था। नक्सली पुलिस से बचने के लिए बेहद सावधानी बरतते हैं। पूर्वांचल में बढ़ाई जा रही नक्सली गतिविधियों से जुड़े सहयोगी संगठनों के संचालक व सदस्य तथा भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी के मुख्य सदस्यों के बीच कभी मोबाइल व अन्य दूसरे माध्यम से सीधे संपर्क नहीं होता था। उनके बीच हमेशा संदेश वाहक चिट्ठी, मेमोरी कार्ड व पैन ड्राइव के माध्यम से सूचनाएं पहुंचाता था।

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