मुख्यपृष्ठस्तंभचौथे स्तंभ पर प्रहार भारी पड़ेगा!

चौथे स्तंभ पर प्रहार भारी पड़ेगा!

दिल्ली से
योगेश कुमार सोनी

बीते ३ अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने देश के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के घरों पर छापेमारी की और उनके फोन और लैपटॉप तक जप्त करके ले गए। इनमें से कुछ पत्रकारों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया था। यह सभी पत्रकार न्यूजक्लिक से जुड़े हुए हैं। इस पूरे प्रकरण में आश्चर्य यह होता है कि आखिर मोदी सरकार किस हद जा रही है। जो भी सच्चाई व तथ्यों को उजागर करे, वो सरकार विरोधी माना जा रहा है। एजेंसी जो आरोप लगा रही है, उससे स्टैंड कहां और किस बात का बन रहा है? जिन ९ पत्रकारों के यहां दिल्ली पुलिस ने छापेमारी की है, वे सारे के सारे सरकार की खामियों को जनता से अवगत कराते रहते हैं। जब-जब किसी तानाशाह व सत्ताधारी ने चौथे स्तंभ पर प्रहार किया, तब-तब संचार की दुनिया में तबाही आई है। आज देश के बड़े से बड़े संस्थान सरकार की वाहवाही करने में लगे हुए हैं और उनको ऐसा लग रहा है कि हम ऐसे करके सरकार व जनता की निगाह में हीरो बन रहे हैं। वे यह नही जानते कि सरकार को तो चापलूसी करके कुछ समय के लिए खुश कर सकते हैं लेकिन जनता को बेवकूफ नहीं बना सकते हैं। देश किस स्थिति में है यह सबको भलीभांति पता है व उसके अलावा हालात क्या हैं यह भी किसी से छुपा नहीं है। पत्रकार का काम होता है, सरकार व तंत्र की जो कमियां है, उसको अपने माध्यम से सरकार व जनता को अवगत कराए। लेकिन आजकल अधिकतर चैनल व अखबार सिर्फ और सिर्फ केंद्र सरकार की ऐसे बड़ाई करने में लगे रहते हैं, जैसे कि हम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हैं और सबसे खुशहाल देश हैं। बीते दशक भर में मीडिया का स्तर इतना नीचे गिर गया, अब लोगों को इस शब्द व पेशे से घिन आने लगी है। चूंकि सच्चाई व तथ्यों से किसी का कोई लेना-देना ही नहीं रह गया और जो लोग सच्चाई को सामने ला रहे हैं, उनको प्रशासनिक तंत्र द्वारा फंसाने की हर समय कोशिश लगी रहती है। जो लोग इस सरकार में उनका सच सामने ला रहे हैं, हकीकत में वो योद्धा का काम कर रहे हैं। चूंकि उनको पता है कि आज की स्थिति में सरकार के खिलाफ बोलना, अपनी व अपने परिवार की जान जोखिम में डालना है, फिर भी वे मुखर होकर सच्चाई को सामने लाने का काम कर रहे हैं। ये सारे वो पत्रकार हैं, जो अपने समय में बड़े पदों पर रहते हुए लाखों-करोड़ों कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा न करते हुए मात्र अपना पालन-पोषण करके ही जीवन व्यतीत किया। किसी के पास भी लाखों-करोड़ों की संपत्ति नहीं है, जिसकी जांच कई बार एजेंसियों द्वारा कराई जा चुकी है। बहरहाल, हमारा मीडिया संस्थान भी सच्चाई दिखाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम हर चीज का सामना करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि हमारे अखबार का नाम ही ‘सामना’ है। कई दशकों से हमने वो खबरें दिखाई है, जो किसी भी संस्थान में दिखाने की हिम्मत नहीं थी। हमारे साथ पूरे देश की जनता का आशीर्वाद व सहयोग है, जिसके दम पर हम हर परिस्थितियों में जनता के मुद्दों को सबके सामने लाते रहेंगे।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक
मामलों के जानकार हैं।)

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