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केंद्र की नीतियों से टूटने लगी आम नागरिकों की कमर, आरबीआई की मौद्रिक नीति का फटका लगना हुआ शुरू

• चार राष्ट्रीय बैंकों ने कर्ज पर ब्याज दर बढ़ाई
सामना संवाददाता / मुंबई
भारत के शीर्ष बैंक आरबीआई ने हाल ही में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दर ०.४० प्रतिशत से बढ़ाकर ४.४०³ किए जाने की घोषणा की है। इसके बाद चार राष्ट्रीय बैंकों ने कर्ज पर ब्याज दरें बिना देर किए बढ़ा दी हैं। कई बैंकों ने खुदरा ऋण के लिए लागू रेपो या बेंचमार्क लिंक्ड रेट ५ मई, २०२२ से ०.४० फीसद बढ़ा दी हैं। दो सरकारी और दो निजी बैंकों ने सबसे पहले ये पहल की है। केंद्र की इन नीतियों के कारण आम नागरिकों की कमर अब टूटने लगी है। आरबीआई की मौद्रिक नीति का फटका अब उन्हें लगना शुरू हो गया है।
ऐसे टूटी जनता की कमर
आरबीआई की घोषणा के २४ घंटे के अंदर ही बैंकों ने अपने होम लोन सहित अन्य लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया है, जिससे जनता की कमर टूटने लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कर्ज की लगाम ढीली छोड़ते ही बैंकों ने बिना किसी ज्यादा इंतजार के २४ घंटे के अंदर ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी शुरू कर दी। आरबीआई की रेपो रेट और वैâश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) बढ़ाने की घोषणा के अगले ही दिन देश के कई बड़े बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाने की घोषणा कर दी है।
इन बैंकों ने बढ़ाई ब्याज दर
बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) और आईसीआईसीआई बैंक ने अपने सभी तरह के कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। इस प्रकार दोनों बैंक से होम, ऑटो और पर्सनल लोन सहित सभी पुराने और नए ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा हो गया है। इन दोनों बैंकों ने रेपो रेट से जुड़ी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी बेवसाइट पर ब्याज दरें बढ़ाने की घोषणा भी कर दी है। बैंक ने अपने ग्राहकों को बताया है कि आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई वृद्धि के अनुसार बैंक ने एक्टरनल बेंचमार्क लेंडिंग रेट बढ़ा दिया है। इसी तरह बीओबी ने भी रिटेल लोन के लिए रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट को ४० बीपीएस बढ़ाकर ६.९० पर्सेंट कर दिया है। आईसीआईसीआई बैंक की बढ़ी हुई दर चार मई और बैंक ऑफ बड़ौदा की बढ़ी दरें पांच मई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने भी रेपो दर में बढ़ोतरी के बाद अपनी ब्याज दरों में वृद्धि की घोषणा की है। बैंक ऑफ इंडिया ने भी रेपो दर में वृद्धि के साथ अपनी आरबीएलआर को पांच मई, २०२२ से बढ़ाकर ७.२५ प्रतिशत कर दिया है, जबकि सेंट्रल बैंक ने भी अपने आरबीएलआर में ०.४० फीसद की वृद्धि करते हुए इसे ७.२५ फीसद कर दिया है। यह छह मई, २०२२ से लागू हुई हैं। ईबीएलआर बाह्य मानक दर और कर्ज जोखिम प्रीमियम का जोड़ होता है।
ये होता है एक्सटर्नल बेंचमार्क लोन रेट
एक्सटर्नल बेंचमार्क की व्यवस्था २०१९ से शुरू हुई है। आरबीआई ने एक अक्टूबर, २०१९ से फ्लोटिंग रेट वाले सभी नए पर्सनल या रिटेल लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य बना दिया था। यहां निजी बैंकों को खास रूप से कोई भी एक्सटर्नल बेंचमार्क तय करने की आजादी है। एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट बैंक द्वारा लोन देने की सबसे कम ब्याज दर होती है। बैंक इसके नीचे लोन नहीं दे सकता। बैंक इसी एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट और रेपो रेट के ऊपर क्रेडिट रिस्क प्रीमियम जोड़कर कुल ब्याज दर तय करते हैं।

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