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जन्म से ही जारी है जीने की जंग! … रोंगटे खड़े कर देगा गाजा के प्रीमेच्योर बच्चों का दर्द

मनमोहन सिंह

`यह वही बच्ची है, जिसको पाने के लिए मैंने ऊपरवाले से दुआ मांगी थी, दुआ तो कबूल हो गई बस इतनी रहमत और हो कि मैं इसे बाहों में उठाकर सीने से लगा लूं और अपने घर ले जा सकूं।’

गाजा पट्टी का गाजा शहर। अल-शिफा अस्पताल का प्रसूति वॉर्ड। वॉर्ड में नीरव शांति छाई हुई है। सुनाई पड़ रही है तो सिर्फ बीप…बीप …बीप की आवाज। वेंटिलेटर से जुड़े बहुत सारे मेडिकल इक्विपमेंट। मॉनिटरिंग स्क्रीन पर दिल की धड़कन और सांसों की लय बतौर ग्राफ दिखाई दे रही है।
प्रीमेच्योर बर्थ यानी समय से पहले जन्मे नवजात शिशु यहां पर इनक्यूबेटर में रखे गए हैं। ऑक्सीजन की पतली नलियां उनके शरीर में जीवन का संचार कर रही हैं। इनमें से अधिकतर शिशुओं का जन्म, दक्षिणी इजराइल पर हमास के हमले के बाद गाजा पट्टी पर इजराइल के नवीनतम युद्ध के पैâलने से कुछ दिन पहले या कुछ दिन बाद हुआ था। अधिकतर शिशुओं को इनक्यूबेटर में रखना पड़ा, क्योंकि जन्म से उनका शरीर नीला पड़ा हुआ था, यानी ऑक्सीजन की कमी। उनके फेफड़े इतने कमजोर हैं कि वह खुद ऑक्सीजन ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं इन्हें नलियों के जरिए प्राण वायु दी जा रही है।
कुछ ऐसी ही तस्वीर है दक्षिणी गाजा पट्टी में खान यूनिस के नासिर मेडिकल अस्पताल की। अस्पताल के नियोनेटल आईसीयू में १० से ज्यादा नवजात शिशु हैं, जिनका जन्म प्रीमेच्योर हुआ है। मेडिकल तौर पर तो इन सभी नवजात शिशुओं का इलाज अस्पताल के पेडियाट्रिक डॉक्टर अपनी जान लगाकर कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी है तो वह यही कि यदि अस्पताल की बिजली चली गई तो इन्हें कौन बचाएगा? वैâसे बच पाएगी उनकी जिंदगी? फिक्रमंद डॉक्टर कहते हैं, `हमें जरूरत है फ्यूल की, जिससे अस्पताल का जनरेटर चलता रहे और उनकी जिंदगी भी। बच्चों के परिजन दुआ कर रहे हैं कि ऐसा बुरा वक्त न आए, इनमें से कुछ ऐसे बच्चे हैं, जो अपने परिवार के इकलौते चिराग हैं। इनक्यूबेटर में अपने जिगर के टुकड़े को देखकर एक मां कहती है, `यह वही बच्ची है, जिसको पाने के लिए मैंने ऊपरवाले से दुआ मांगी थी, दुआ तो कबूल हो गई बस इतनी रहमत और हो कि मैं इसे बाहों में उठाकर सीने से लगा लूं और अपने घर ले जा सकूं।’ दूसरी एक मां को यह चिंता सता रही है कि जो मशीन उनके बच्चे को जीवित रखती है, वह कहीं खामोश न हो जाए। उसे अपने ३ साल के बच्चे के साथ-साथ शौहर की भी चिंता है, जो दर-ब-दर भटक रहे हैं अपने रिश्तेदारों की तलाश में। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि १३० नवजात शिशु वर्तमान में पट्टी भर में इनक्यूबेटरों पर निर्भर हैं।

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