मुख्यपृष्ठविश्वजेल का खूनी खेल, जहां मिलती है मिनटों में मौत! ...क्रूर यातनाओं...

जेल का खूनी खेल, जहां मिलती है मिनटों में मौत! …क्रूर यातनाओं से कांपे कैदी

न खाना दिया जाता है न पानी

मनमोहन सिंह

सेडनाया जेल। दमिश्क के उत्तर का पहाड़ी इलाका। चारों तरफ से सेना की टुकडियों से घिरा। यहां पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता। यह सीरिया का कुख्यात डिटेंशन सेंटर है। २०११ से २०२० के बीच सीरिया में चले सिविल वॉर के दौरान लाखों की तादाद में उन लोगों को यहां पर वैâद कर दिया गया, जिन्होंने तत्कालीन शासन के खिलाफ आवाज उठाई। जिन्होंने आंदोलन में भाग लिया, जिन्होंने नारेबाजी की उन्हें ढूंढ़-ढूंढ़कर इस डिटेंशन चेंबर में ठूंस दिया गया।
पहली बार, एसोसिएशन ऑफ डिटैनीज एंड द मिसिंग ऑफ सेडनाया प्रिजन (एडीएमएसपी) द्वारा कुख्यात डिटेंशन सेंटर में अत्याचारों का खुलासा किया गया। एडीएमएसपी की रिपोर्ट के अनुसार बशर अल-असद के शासन के साथ सेडनाया के संबंधों के चलते, इन डिटेंशन सेंटर में चल रहे `जघन्य अपराधों’ के बावजूद यहां के कुकृत्यों को कानूनी जामा पहनाकर इसे जारी रखने की अनुमति दी जाती रही है। डिटेंशन सेंटर पर ज्यादातर राजनीतिक वैâदी हैं, जिनके साथ बार-बार मनमाने ढंग से दुर्व्यवहार किया जाता है। उनकी दर्दनाक पिटाई की जाती है, क्रूर यातनाएं दी जाती हैं, भूखा रखा जाता है उन्हें कोई मेडिकल सुविधा मुहैया नहीं कराई जाती, बिना चिकित्सा देखभाल के मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए, सैन्य अदालतों द्वारा अक्सर कुछ ही मिनटों में मौत की सजा दे दी जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, तिशरीन सैन्य अस्पताल के बंदियों के शवों को मांस के ट्रकों में भर कर सामूहिक कब्रों में दफना दिया जाता है। यहां बंदियों के शवों को ४८ घंटे तक रखा जाता है। बंदियों के परिवारों को कभी भी अपने प्रियजनों के शव नहीं मिलते। यहां पर इंसानों के साथ जानवरों से बदतर सलूक किया जाता है, सजा के तौर पर मिनट भी नहीं लगता उनके तन से सिर को जुदा होने में।
जज नायेफ अल-रिफाई की मौत!
`मैं जज अल-रिफाई को २०१२ में `रेड बिल्डिंग,’ सेदनायाह जेल में जानता था और अप्रैल २०१४ में उनके मारे जाने तक हम साथ रहे। अल-रिफाई दारा के एक कुलीन परिवार से थे। जेल में उन्हें अन्य वैâदियों की तुलना में अधिक यातनाएं दी जाती थीं। अल-रिफाई ने पूरे दिलों-दिमाग से क्रांति का समर्थन किया। उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। अल-रिफाई की पत्नी की अंतिंम यात्रा के बाद, सफिता के आइसा मोहम्मद नामक एक जेलर ने रिफाई को वापस डॉरमेटरी में भेज दिया। मेरा मानना ​​है कि मोहम्मद ने अकेले ही १,००० से ज्यादा कैदियों को मौत के घाट उतार दिया था। आइसा ने अल-रिफाई को घुटने टेकने का आदेश दिया और उसके पेट पर लोहे के पाइप से मारना शुरू कर दिया और फिर बाहर चला गया। पांच मिनट बाद, अल-रिफाई के मुंह से खून बहने लगा और वह बेहोश हो गया। नायेफ मूल रूप से अच्छे कद काठी के थे, लेकिन भूख और बीमारी ने कमजोर कर दिया था।

अन्य समाचार