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बेरोजगारी का फूटा ‘बम’… दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक मचा घमासान… रोजगार पर आंकड़ें खोल रहे पोल

सामना संवाददाता

१३ दिसंबर २०२३ का दिन हर दिन जैसा ही था। देश की नई संसद में आम दिनों के जैसे ही लोकसभा में कार्यवाही चल रही थी, लेकिन तभी वह हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। दो युवक दर्शक दीर्घा से कूदकर हॉल में आ गए और स्मोक बम छोड़ दिया। जिसके बाद पूरे हॉल में पीला धुआं छा गया। उस समय सदन में कई सीनियर नेता भी मौजूद थे, जिनमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी मौजूद थे। इसके अलावा संसद के बाहर भी दो लोगों ने इसी करतूत को अंजाम दिया, जिसमें एक महिला भी थी। पकड़े गए सभी आरोपियों का कहना था कि उन्होंने देश में बढ़ रही महंगाई और बेरोजगारी के चलते सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए संसद में स्मोक बम छोड़ा था। इस मामले को संसद पर दूसरा हमला भी कहा जाने लगा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा है कि संसद सुरक्षा चूक एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इस घटना को अंजाम देने वाले युवकों ने बेरोजगारी और महंगाई के कारण यह कदम उठाया है। राहुल गांधी ने साफ-साफ कहा कि पीएम मोदी की नीतियों के कारण हिंदुस्थान के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है।
विपक्ष ने तले पकौड़े
इसके तीन दिन बाद ही महाराष्ट्र में चल रहे विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के सातवें दिन विपक्ष ने बेरोजगारों का मजाक उड़ाने के विरोध में विधानभवन की सीढ़ियों पर प्रतीकात्मक पकौड़े तले। दरअसल, विपक्ष राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के उस विवादित बयान से खफा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएचडी करके छात्रों ने क्या रोशन कर लिया है? हालांकि, बाद में उन्होंने इस बयान के लिए माफी भी मांग ली। लेकिन इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि बेरोजगारों को लेकर उनकी क्या मानसिकता है?

बेरोजगारों का नहीं, हो रहा है पंजीकरण

बेरोजगारी से जुड़ा एक दृश्य मुंबई से सटे ठाणे से भी सामने आया। महाराष्ट्र में बेरोजगारों को नौकरी देने के लिए महास्वयं पोर्टल शुरू किया गया है, लेकिन ठाणे में बेरोजगारों का पंजीकरण महास्वयं पोर्टल धीमा चल रहा है, जिसकी वजह से बेरोजगार अपना पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं। इसका कारण पूछने पर संबंधित अधिकारी पोर्टल का सर्वर धीमा होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। यह समस्या जिले के मुरबाड, शाहपुर, भिवंडी सहित अन्य क्षेत्रों के युवाओं द्वारा दर्ज कराई गयी हैं।
उपरोक्त तीनों दृश्य को देखकर यह समझ में आ जाता है कि रोजगार के प्रति दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक सत्ताधीशों का क्या रवैया है? पीएम नरेंद्र मोदी ने हर साल २ करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन आज तक कितने करोड़ लोगों को रोजगार दिया गया यह आंकड़ा मिस्टर इंडिया से भी आगे नजर आता है, जो कि चश्मा लगाने पर भी नजर नहीं आता है। लघु उद्योगों के लिए लोन देने वाली नीति को लेकर भी कुछ आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं, कितने लोगों ने लोन लिया और कितने लोगों ने रोजगार शुरू किया?

देश में बेरोजगारी के आंकड़े

बेरोजगारी की समस्या हिंदुस्थान के लिए गंभीर हो चुकी है। हिंदुस्थान में तो दशकों से बेरोजगारी गंभीर चुनावी मुद्दा बनता आया है और इसके कारण कई सारे आंदोलन भी हुए हैं, अगर सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर के हिसाब से बात करें तो भारत भी दुनिया की चोटी के देशों में शामिल है। देश में बेरोजगारी दर की बात करें सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार, १५ वर्ष और उससे अधिक आयु के स्नातकों के बीच सबसे कम बेरोजगारी दर (५.६ प्रतिशत) चंडीगढ़ में रही। इसके बाद ५.७ प्रतिशत के साथ दिल्ली का स्थान रहा। आंकड़ों के अनुसार, २०२२-२३ में सबसे ऊंची बेरोजगारी दर (३३ प्रतिशत) अंडमान और निकोबार द्वीप में रही। इसके बाद लद्दाख में यह दर २६.५ प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में २४ प्रतिशत रही। बड़े राज्यों की बात करें, तो राजस्थान में बेरोजगारी दर २३.१ प्रतिशत और ओडिशा में २१.९ प्रतिशत थी।

पीएम के दावे की खुली पोल

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि हिंदुस्थान की विस्तारित अर्थव्यवस्था युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है और देश की बेरोजगारी दर छह वर्षों में सबसे निचले स्तर पर है। लेकिन सीएमआईई (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) की ताजा रिपोर्ट उनके दावों की पोल खोल कर रख दी है। सीएमआईई का कहना है कि भारत में बेरोजगारी दर दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार, हिंदुस्थान की बेरोजगारी दर अक्टूबर में दो वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी है। अक्टूबर में कुल बेरोजगारी दर ७.०९ से बढ़कर १०.०५ फीसदी हो गई, जो मई २०२१ के बाद से उच्चतम दर है।

सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले देश

दुनिया के करीब एक दर्जन देशों में अभी ५ फीसदी से ज्यादा बेरोजगारी है। हिंदुस्थान के बाद ७.२ फीसदी की बेरोजगारी के साथ प्रâांस का नंबर है। वहीं अर्जेंटीना, जर्मनी, इंडोनेशिया, चीन और कनाडा में भी बेरोजगारी दर ५-५ फीसदी से ज्यादा है। अगर टॉप टेन बेरोजगार देशों की बात करें तो हिंदुस्थान छठे स्थान पर है, अन्य देशों की स्थिति इस प्रकार है।

आंकड़े प्रतिशत में

साउथ अफ्रीका- ३२.७
स्पेन- १३.२६
टर्की- १०
ब्राजील- ८८
इटली- ७८
इंडिया- ७८
प्रâांस- ७२
अर्जेंटीना- ६३
जर्मनी- ५६
इंडोनेशिया- ५.४५ प्रतिशत

बढ़ी बेरोजगारी की दर

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी लिमिटेड के आंकड़े खुलासा करते हैं कि समग्र दर सितंबर में ७.०९ फीसदी से बढ़कर पिछले महीने १०.०५ फीसदी हो गई, जो मई २०२१ के बाद सबसे अधिक है। ग्रामीण बेरोजगारी ६.२ फीसदी से बढ़कर १०.८२ फीसदी हो गई, जबकि शहरी दर थोड़ी कम हुई। जानकार बताते हैं कि सरकार केवल वार्षिक आधार पर देशव्यापी बेरोजगारी दर और शहरी क्षेत्रों के लिए हर तिमाही में एक दर प्रकाशित करती है। अक्टूबर में जारी सबसे हालिया आधिकारिक रिपोर्ट में २०२२-२०२३ के लिए देश में बेरोजगारी दर ३.२ फीसदी बताई गई है। गौरतलब है कि हिंदुस्थान में बेरोजगारी दर अगस्त में बढ़कर ८.२८फीसदी हो गई थी। ये अगस्त २०२१ के बाद सबसे ऊंची दर थी जबकि जुलाई में बेरोजगारी दर ६.८ फीसदी थी।

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