मुख्यपृष्ठसमाचारपुलवामा के खुलासे का खामियाजा!... `सत्य' पर असत्य का धावा

पुलवामा के खुलासे का खामियाजा!… `सत्य’ पर असत्य का धावा

-सामना संवाददाता / नई दिल्ली

केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपा पूरी तरह से तानाशाही पर उतर चुकी है। इसके दो मुख्य हथियार ईडी और सीबीआई हैं। किसी भी पार्टी को तोड़ना हो या विपक्ष का कोई नेता केंद्र सरकार के खिलाफ बोलता है या उसकी कारस्तानियों की पोल खोलता है तो केंद्र उसके घर ईडी और सीबीआई के छापे मरवा देती है। कुछ इसी तरह की खुन्नस केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर निकाला है। मलिक बार-बार केंद्र की पोल खोलते रहे हैं, जिसमें पुलवामा मामला भी शामिल है। जानकारों की मानें तो मलिक को शायद पुलवामा खुलासे का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि ये `सत्य’ पर असत्य का धावा है।
बता दें कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कल सीबीआई ने ३० लोकेशन पर छापेमारी की। उसमें यूपी, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा जैसे राज्यों की जगहें शामिल हैं। सत्यपाल मलिक और उनके करीबियों के यहां छापेमारी की गई। इसके अलावा कीरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से के अधिकारियों के यहां भी रेड मारी गई। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जम्मू कश्मीर में दो परियोजनाओं में ३०० करोड़ की घूस की पेशकश के आरोप लगाए थे। उसके बाद सीबीआई ने अप्रैल २०२२ में पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और कारवाई शुरू की थी। इस परियोजना में २,२०० करोड़ रुपए के कॉन्ट्रेक्ट देने गड़बड़ी के आरोप हैं।
पुलवामा हमले की खोली पोल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने २०१९ के पुलवामा हमले के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताते हुए कई सनसनीखेज दावे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि २०१९ में कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ हमला सिस्टम की `अक्षमता’ और `लापरवाही’ का नतीजा था। उन्होंने इसके लिए सीआरपीएफ और केंद्रीय गृह मंत्रालय को खासतौर पर जिम्मेदार बताया था। मलिक ने कहा था कि सीआरपीएफ ने सरकार से अपने जवानों को ले जाने के लिए विमान उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सीआरपीएफ का काफिला जाते वक्त रास्ते की उचित तरीके से सुरक्षा जांच न कराने का भी आरोप सरकार पर लगाया था।
किरू प्रोजेक्ट का भी किया था खुलासा
किरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर में ६२४ मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए शुरू किया जाने वाली योजना है। इसे २०१९ में केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी। गौर करने वाली बात है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक यदि घोटालेबाज थे तो भाजपा ने उन्हें जम्मू और गोवा का राज्यपाल क्यों बनाया। वैसे मलिक ने अपने कार्यकाल के दौरान आरोप लगाया था कि उन्हें किश्तवाड़ में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से संबंधित दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए ३०० करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की गई थी।
नूंह हिंसा सुनियोजित
जुलाई २०२३ में हरियाणा के नूंह में हुई हिंसा को लेकर भी सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। अगस्त २०२३ में उन्होंने कहा था कि ये हिंसा अनायास नहीं थी। उन्होंने दावा किया था कि सांप्रदायिक भेदभाव पैदा करने के लिए सात से आठ अलग-अलग जगहों पर सुनियोजित तरीके से हमले किए गए थे। उन्होंने कहा था कि अगर इन लोगों पर काबू नहीं पाया गया तो पूरा देश मणिपुर की तरह जल जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया था कि २०२४ के चुनाव तक ऐसे हमले और बढ़ेंगे।
किसानों का किया था समर्थन
मलिक ने कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का समर्थन किया था। हरियाणा की चरखी दादरी की सांगवान खाप चालीस के प्रधान सोमवीर सांगवान के पत्र के जवाब में उन्होंने कहा था कि मैं आपको और खाप पंचायत के लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि कभी आप लोगों का साथ नहीं छोड़ूंगा। उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को यह बताने की कोशिश की थी कि वे गलत रास्ते पर हैं और किसानों को दबाने, डराने और धमकाने का प्रयास न करें। मलिक ने यह भी कहा था कि किसानों को दिल्ली से खाली हाथ न लौटाएं।
केजरीवाल को ७वां समन जारी
शराब नीति में हुए कथित घोटाले के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने सातवां समन जारी किया है। जांच एजेंसी ने दिल्ली सीएम से २६ फरवरी (सोमवार) को पेश होने के लिए कहा है। नोटिस पर आम आदमी पार्टी ने कहा है कि केजरीवाल को गैरकानूनी नोटिस भेजा गया है। `आप’ ने बार-बार ये सवाल उठाया है कि किस आधार पर ये समन भेजा गया है, जब ईडी खुद इस मामले को लेकर कोर्ट गई है तो इंतजार क्यों नही कर सकती। ईडी सिर्फ अरविंद केजरीवाल को डराना चाहती है। चंडीगढ़ में सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से पैâसला सुनाया है, उसी का बदला अरविंद केजरीवाल से लिया जा रहा है।

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