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रुक गया है कारवां

रुक गया है कारवां इस शोर के बाजार में।
यह खबर भी आ गई है आज के अखबार में।।
चल-चलो सब एकता की राह में दिल खोल कर।
जंग कैसे लग गई है क्रांति के हथियार में।।
अब अगर आजाद होना है तो आगे आइए।
गाईए दिल खोलकर अब इस नए त्योहार में।।
आज मंजिल की तरफ बढ़ते रहें-बढ़ते रहें।
कुछ नया करते रहें बस इस नए अवतार में ।।
उलझनों को पंख लगते जा रहे हैं आजकल।
रुक न जाना इस सफर के इस नए रफ्तार में।।
सामने बैठी मुसीबत रोकती है राह को।
बस वहीं पर रुक न जाना तुम कहीं बेकार में।।
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