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डॉक्टरों के दबाव में झुकी केंद्र सरकार! …गरीबों की नहीं है परवाह जेनेरिक दवाइयों के सर्कुलर पर लगानी पड़ी रोक

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
केंद्र सरकार ने गरीब मरीजों का मसीहा बनने के लिए दो अगस्त को जेनेरिक दवाओं को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर में हिंदुस्थान में सभी चिकित्सकों को ब्रांडेड कंपनियों की बजाय जेनेरिक दवाएं लिखने की सख्ती की गई थी। इसके साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि ऐसा न करने पर संबंधित चिकित्सकों के लाइसेंस को रद्द करने के साथ ही दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया था। इसका मकसद था कि गरीब मरीजों के साथ मची लूट को रोका जा सके और उन्हें सस्ती दर पर अच्छी दवाइयां मिल सके। हालांकि, देशभर में डॉक्टरों की नाराजगी और दबाव के आगे केंद्र सरकार झुक गई और गरीबों के हित में जारी किए गए सर्कुलर पर अगले आदेश तक रोक लगानी पड़ी। इससे डॉक्टरों में तो खुशी देखी जा रही है, लेकिन आम जनता को पहले की तरह अपने स्वास्थ्य पर भारी भरकम रकम खर्च करनी पड़ेगी।
उल्लेखनीय है कि दो अगस्त को जारी किए गए एनएमसी नियमों के अनुसार, चिकित्सकों को जेनेरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। इस आदेश का बार-बार उल्लंघन करने पर चिकित्सक का प्रैक्टिस करने का लाइसेंस एक विशेष अवधि के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा। साथ ही चिकित्सकों को यह भी निर्देश दिया गया था कि वे यदि किसी मरीज को दवाएं लिख रहे हैं तो उसे स्पष्ट भाषा में लिखे, ताकि कोई भी पढ़ सके। इसके साथ ही दवाइयों के नाम अंग्रेजी के वैâपिटल लेटर्स में लिखा जाना चाहिए। अगर हैंडराइटिंग सही नहीं है तो पर्ची को टाइप कराकर मरीज को प्रिस्क्रिप्शन दिया जाए। एनएमसी ने एक टेंपलेट भी जारी किया थे। इस टेंपलेट का उपयोग नुस्खा लिखने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। इसके साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने आदेश में कहा था कि अस्पतालों और चिकित्सकों को मरीजों को जन औषधि केंद्रों और अन्य जेनेरिक फार्मेसी दुकानों से दवाएं खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। मेडिकल छात्रों और जनता को उनके ब्रांडेड समकक्षों के साथ जेनेरिक दवाओं की समानता के बारे में शिक्षित करते हुए उनके प्रचार को बढ़ावा देना चाहिए।

चिकित्सकों के लिए यह बड़ी जीत
जेनेरिक दवा विनियमन पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की रोक देश के सभी चिकित्सा संगठनों और डॉक्टरों के लिए एक बड़ी जीत है। यह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, फोर्डा, मार्ड और अन्य संगठनों द्वारा इस संबंध में की गई लड़ाई के कारण ही संभव हो सका है।
– डॉ. अभिजीत हेलगे, अध्यक्ष, सेंट्रल मार्ड

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