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श्रीलंका-ग्रीस जैसी हो जाएगी हिंदुस्थान की हालत!…पीएम मोदी के सामने अधिकारियों की खरी-खरी

सामना संवाददाता / मुंबई । महंगाई कम करके व रोजगार उपलब्ध कराकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय देश में कुछ राजनीतिक दल लोगों को मुफ्त राशन, बिजली और दूसरी जरूरत की चीजें मुफ्त में उपलब्ध कराने का झांसा दे रहे हैं। पार्टियां और सरकारें चुनाव जीतने के लिए बुनियादी सवालों से लोगों का ध्यान भटकाकर गुमराह करने की चाल चल रही हैं जो कि देश के लिए घातक हो सकता है। इस गलत प्रथा की वजह से हिंदुस्थान भी श्रीलंका और यूनान की तरह दिवालिया होने के कगार पर पहुंच सकता है। ऐसी चेतावनी शीर्ष नौकरशाहों ने सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में दी।
बता दें कि पड़ोसी देश श्रीलंका में इन दिनों लोग बदहाली का जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं। वहां दूध, ब्रेड, अनाज, सब्जियों सहित जरूरत की सभी वस्तुओं के दाम आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। अपने शासकों की गलत नीतियों के कारण श्रीलंका की ऐसी अवस्था हुई है। हमारा देश हिंदुस्थान भी उसी मार्ग पर चल रहा है। चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों में मतदाताओं को लुभाने के लिए सबकुछ मुफ्त देने की होड़ मची है। देश के कई शीर्ष नौकरशाहों ने चेतावनी दी है कि अगर इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई तो ये राज्य श्रीलंका और यूनान की तरह कंगाल हो जाएंगे। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कई राज्यों द्वारा घोषित लोकलुभावन योजनाओं पर चिंता जताई और दावा किया कि ऐसी योजनाएं आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं हैं। बाज नहीं आने पर उन्हें वे श्रीलंका के रास्ते पर ले जा सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि बैठक में २४ से अधिक वरिष्ठ सचिवों ने अपने विचार व्यक्त किए और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने मत और सुझाव साझा किए। चूंकि वे सभी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थे इसलिए सभी ने उनकी बातों को ध्यान से सुना। दो सचिवों ने हाल के विधानसभा चुनावों में एक राज्य में घोषित एक लोकलुभावन योजना का उल्लेख किया जो मौजूदा समय में आर्थिक रूप से खराब स्थिति में है। उन्होंने साथ ही अन्य राज्यों में इसी तरह की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि वे राज्य आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं।
यदि ऐसे ही चलता रहा तो आर्थिक तंगी उन राज्यों को श्रीलंका के रास्ते पर ले जा सकती हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह के अंत मे ७, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने शिविर कार्यालय में सभी विभागों के सचिवों के साथ चार घंटे की लंबी बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और वैâबिनेट सचिव राजीव गौबा के अलावा केंद्र सरकार के अन्य शीर्ष नौकरशाह भी शामिल हुए थे। बैठक के दौरान मोदी ने नौकरशाहों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे कमियों के प्रबंधन की मानसिकता से बाहर निकलकर सरप्लस के प्रबंधन की नई चुनौती का सामना करें। मोदी ने उनसे प्रमुख विकास परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ने के बहाने के तौर पर ‘गरीबी’ का हवाला देने की पुरानी लीक छोड़ने और बड़ा दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा।

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