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देश को चाहिए एक पुरुष!- संजय राऊत

पांच राज्यों के नतीजे आज घोषित होंगे। चुनाव में सफलता मिले इसलिए हमारे प्रधानमंत्री अंत में धर्म व मंदिरों के ही शरण में गए। बेरोजगारी, महंगाई के कारण लोग बेजार हो गए हैं। घंटा, थाली बजाकर ‘कोरोना’ भागा नहीं, वैसे ही लद्दाख में घुसा चीन भागेगा नहीं। महंगाई कम नहीं होगी। प्रधानमंत्री मोदी युगपुरुष हैं, ऐसा हमारे उपराष्ट्रपति कहते हैं। देश को अच्छे पुरुषों की जरूरत है!

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजे आज आएंगे। शाम तक पांच राज्य २०२४ के देश का भविष्य तय करेंगे। तेलंगाना में मतदान सबसे अंत में यानी ३० तारीख को हुआ। तेलंगाना में भाजपा कहीं नहीं है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैदराबाद में प्रचार के लिए गए और उन्होंने घोषणा की कि तेलंगाना में हमारी सरकार आई तो हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर करेंगे। हैदराबाद को ‘भाग्यनगर’ करने में देश व जनता की कौन-सी समस्याएं हल होंगी? भाजपा यानी देश में शहरों और सड़कों के नाम बदलनेवाला कारखाना हो गया है। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद, फैजाबाद समेत कई जिलों के नामों को योगी ने बदला, लेकिन प्रदेश में जनता की गरीबी-बेरोजगारी खत्म नहीं हुई। टीपू सुल्तान के बारे में मौजूदा हिंदुत्ववादी लोगों के मत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन टीपू की तलवार ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ चमकी थी। टीपू मैसूर के शासक थे और उनकी राजधानी श्रीरंगपट्टनम थी। टीपू ने श्रीरंगपट्टनम का नाम नहीं बदला था।

टीपू धर्मांध थे और उनके शासन में धर्मांतरण हुए, लेकिन श्रीरंगपट्टनम का नामांतरण उन्होंने नहीं किया। महाराष्ट्र में औरंगाबाद का छत्रपति संभाजीनगर नाम लटका पड़ा है। गुजरात में अहमदाबाद का कर्णावती नहीं हो सका और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी महाराज हैदराबाद में जाकर उस शहर का नाम बदलने की कोशिश में हैं। हैदराबाद के निजाम को स्वतंत्र भारत में विलीन नहीं होना था, लेकिन सरदार पटेल ने पुलिस एक्शन लिया और हैदराबाद निजाम को शरण में आना पड़ा। हैदराबाद ये विजय का प्रतीक है, इसे ऐसे ही रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री मंदिर में

तेलंगाना के प्रचार में जाने से पहले प्रधानमंत्री मोदी तिरुपति बालाजी मंदिर में पहुंचे। माथे पर चंदन, भस्म लगाकर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए उनकी तस्वीरें सभी जगह दिखीं। यह प्रचार का एक हिस्सा बना। उससे पहले वे मथुरा जाकर कृष्ण के चरण में लीन हो गए। उसमें श्रद्धा कम और प्रसिद्धि, प्रचार की भावना ज्यादा दिखी। पांच राज्यों में चुनाव सरकार के कामों व विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जातीय, धार्मिक, धु्रवीकरण करके लड़ाया जा रहा है, लेकिन हमारा चुनाव आयोग भी भाजपा के गर्भ में आंखें बंद कर ध्यान लगाए बैठा है। उसमें अब २२ जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या जाकर राममंदिर का लोकार्पण करने वाले हैं। मतलब २०२४ के भाजपा के प्रचार का और एक उत्सव देश में मनाया जाएगा। राम मंदिर की अक्षत देश के घर-घर में पहुंचाकर २०२४ के प्रचार के मुहूर्त को साधा जाएगा। आखिर में देश की बजाय धर्म महत्वपूर्ण हो गया और उसी धर्म की ढाल आगे करके प्रधानमंत्री मोदी फिर वापस चुनाव में जा रहे हैं। विकास का मुद्दा कहीं नहीं है।

देश कहां जा रहा?

मोदी व उनका दल देव-देव करके चुनाव लड़ रहा है। देश के पुरातन युग में जाने का यह एक प्रकार है। आधुनिकता के मार्ग पर जाना है, विज्ञान का रास्ता पकड़ना है या मोदी के पुरातन मार्ग से जाना है? इस पर विचार करने का समय आ गया है। इस समय भाजपा में मौजूद वरुण गांधी ने वास्तव में अलग विचार रखनेवाला भाषण किया है। वरुण गांधी ने देश की असली तस्वीर अपने भाषण में रखते हुए कहा, ‘मैं भारत माता को मानता हूं। मैं हनुमान भक्त हूं। प्रभु श्रीराम को मैं भगवान मानता हूं, लेकिन जय श्रीराम, भारतमाता की जय केवल यह घोषणा देकर देश में महंगाई, बेरोजगारी जैसी समस्या खत्म होनेवाली है क्या? देश का हर नागरिक महंगाई से बेजार है। युवकों के पास नौकरी, रोजगार नहीं है, इसलिए उनके पास कमाई नहीं है। जिन लोगों ने कर्ज लिए वे उसे वापस नहीं कर सके तो उनकी संपत्ति जप्त होगी। इन सारी समस्याओं का हल केवल ‘जय श्रीराम’, ‘भारतमाता की जय’ से नहीं है।’ श्री वरुण गांधी का यह कहना सही है। श्री मोदी युगपुरुष अथवा विश्वपुरुष हैं, इस तरह का प्रमाणपत्र उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मुंबई में आकर दिया, लेकिन इस देश को केवल एक पुरुष के नेतृत्व की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में दिनदहाड़े जवानों की जान जा रही है। मोदी मंदिर में जाकर पूजा में बैठे फिर भी जवानों की हत्या रुकी नहीं है। हजारों कश्मीरी पंडित, जो हिंदू हैं, आज भी कश्मीर में अपने घर नहीं जा सके हैं। मोदी के देवता उनकी रक्षा नहीं कर सकते। क्योंकि धर्म और ईश्वर का आडंबर पैâलाकर केवल वोट मांगें जा रहे हैं। उत्तराखंड की एक सुरंग में ४१ मजदूर १८ दिनों तक पंâसे हुए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए वहां लोग प्रयत्न कर रहे थे। कोई भी महापुरुष ईश्वर की चौखट पर ध्यानमग्न बैठा इसलिए ४१ मजदूरों के प्राण नहीं बचे। तंत्र, विज्ञान और इंसानों की शक्ति से सुरंग के भीतर पत्थर फोड़कर रास्ता बनाना पड़ा। मोदी तेलंगाना में हिंदुओं के वोट बटोरने के लिए मंदिर में गए और भस्म-चंदन लगाकर बैठे। उनकी ध्यान मुद्रा से घबराकर लद्दाख में घुसे चीनी सैनिक पीछे नहीं हटनेवाले।

नौकरी कब दोगे?

उत्तर प्रदेश में राम मंदिर उद्घाटन समारोह की भव्य राजनीति की जाएगी। श्री मोदी के हाथों मंदिर का लोकार्पण हो रहा है, यह अच्छा है, लेकिन इस समय विभिन्न सरकारी विभागों में सवा करोड़ पद खाली हैं, वे कब भरेंगे? ये नौकरियां देने का काम मंदिर से नहीं होगा। वह सरकार को ही करना पड़ेगा। ८० करोड़ लोगों को सरकार मुफ्त में राशन दे रही है। यह आत्मनिर्भर बनाने की नीति नहीं है। मुफ्त, फोकट में देना यह कमजोर को और अधिक कमजोर व गरीब-गुलाम बनाने जैसा है। किसानों को उनकी उपज का उचित भाव नहीं मिल रहा है। गारंटी मूल्य भी नहीं है। किसानों की आय दोगुना करेंगे, यह श्री मोदी व उनके पार्टी का वचन था, उस वचन को पूरा करने की जवाबदारी अयोध्या में श्रीराम पर नहीं डाली जा सकती है। गैस सिलिंडर, मिट्टी का तेल, दूध, प्याज, अनाज महंगे हो गए। मंदिर में घंटा बजाकर, शिखा में घी लगाकर, केदारनाथ की गुफा में ध्यान मग्न बैठने की तस्वीर प्रसारित करने से यह समस्या खत्म नहीं होगी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जिन्हें युगपुरुष संबोधित किया है, वे पहले पुरुष तो बनें। पुरुषों को इंसान बनना चाहिए और उस इंसान को आंखें खोलकर महान राष्ट्र की समस्याएं देखनी चाहिए। ऐसे महापुरुष ने इस समय, धर्मवीर, हिंदूहृदयसम्राट पदवी से खुद को चिपकाने की दुकान खोल रखी है। भाजपा के राज में यह इतना सस्ता है!

 

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