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रूस के `स्टॉर्म-जेड’ यूनिट का काला सच!

२९ साल का अर्टोम शचिकिन से जब रूस के डिफेंस मिनिस्ट्री से आए हुए अधिकारियों ने पूछा कि क्या वो एक सैनिक के तौर पर यूक्रेन जाकर लड़ना पसंद करेगा तो उसने हां कह दिया। उस वक्त वो जेल में था। एक डकैती के सिलसिले में उसे २ साल की सजा हुई थी। उसकी रिहाई इस साल दिसंबर में होने वाली थी, वह अपना आपराधिक रिकॉर्ड साफ करना चाहता था और पैसा कमाना चाहता था, ताकि अपने घर का रिनोवेशन कर सके। उसे इस नौकरी के ऐवज में २,००० रूबल यानी तकरीबन १,७०,००० रुपए मिलने वाले थे।

मई तक शचिकिन को २९१वीं गार्ड्स मोटराइज्ड राइफल रेजिमेंट की एक विशेष इकाई को सौंपा गया। शचिकिन को दक्षिणी यूक्रेन में जापोरिजिया क्षेत्र में तैनात किया गया था, जहां कीव यूक्रेन की सेनाएं रूसी सुरक्षा को तोड़ने की कोशिश कर रही थी। शचिकिन के रिश्तेदारों को आखिरी बार १८ जून को उसके बारे में पता चला कि वो जिस यूनिट के साथ था, वो आग की चपेट में आ गई थी। उसके तीन साथी मारे गए, कुछ घायल हुए और कुछ बच गए। लेकिन शचिकिन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। शचिकिन के परिवार को आज भी उसका इंतजार है, लेकिन रूस की सरकार की तरफ से उन्हें किसी तरह की जानकारी नहीं मिल रही है।

शचिकिन की तरह रूस के कारागार से हजारों हजारों की संख्या में कैदियों को सी रशियन डिफेंस ने यूक्रेन से चल रही लड़ाई में फ्रंट पर भेज दिया गया था। या सीधे शब्दों में कहे तो उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया गया, जहां पर उनकी देखरेख करने वाला या उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। शचिकिन भी उनमें से एक था। जब शचिकिन ने रशियन डिफेंस के उस ऑफर को स्वीकार किया था तो उसे पता नहीं था कि वह रूस के `स्टॉर्म-जेड’ यूनिट का हिस्सा बनने जा रहा है।
इस यूनिट में भेजे गए सैनिकों को तो सैन्य ट्रेनिंग मिली है, लेकिन जेल से भेजे गए वैâदियों को सिर्फ १५ दिन की ट्रेनिंग के बाद सीधे युद्ध के मैदान में उतार दिया जाता है। इस यूनिट के कुछ सैनिकों ने मीडिया से बातचीत में जो कुछ कहा, वह सच चौंका देने वाला था। उनके अनुसार उन्हें एक शिकार के तौर पर मरने के लिए जंग के मैदान में भेज दिया जाता है। उन्हें जो हथियार दिए जाते हैं, वह पुराने होते हैं या कभी-कभार काम नहीं करते। जब वो घायल हो जाते हैं तो उन्हें कोई मेडिकल सपोर्ट नहीं मिलता और मारे जाने पर उनके शव ऐसे ही सड़ते रहते हैं।
यूक्रेन-रूस युद्ध में लाखों की संख्या में रूसी सैनिकों के मारे जाने के बाद रूस में राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ नाराजगी पैâल गई। रूस में चुनाव नजदीक हैं। पुतिन फिलहाल जनता की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते इसलिए पुतिन ने अपने खास लोगों के साथ मिलकर यह यूनिट तैयार की है। वैसे भी युद्ध के दौरान सैनिकों के तौर पर वैâदियों को सैनिकों के तौर पर इस्तेमाल करने का रूस का पुराना इतिहास रहा है। फिलहाल, इस यूनिट को लेकर भी रूस में लोगों के मन में असंतोष है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पुतिन की छीछालेदर हो रही है।

क्या है ‘स्टॉर्म-जेड’?

`स्टॉर्म-जेड’ यूनिट में सजायाफ्ता अपराधियों के अलावा रूसी डिफेंस के सैनिक भी हैं, जिन्हें उनके छोटे-मोटे अपराधों के चलते इस यूनिट में भेज दिया गया। उनकी गलती थी कि उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान या शराब पी रखी थी या फिर ड्रग्स लिया था। इन सैनिकों का आरोप है कि उनके इन अपराधों के चलते न तो उन्हें मिलिट्री कोर्ट के सामने पेश किया गया और न ही कोई कोर्ट ने उन्हें कोई सजा मुकर्रर की।

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