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गुजरात मॉडल का ‘काला सच’.. राजकोट हादसा… बिना फायर एनओसी के चल रहा था गेमिंग जोन

-बाहर निकलने का था सिर्फ एक गेट

-संचालक के पास लाइसेंस भी नहीं था

सामना संवाददाता / राजकोट

राजकोट के गेमिंग जोन में लगी भीषण आग में २७ लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस आग लगने की घटना की जांच जारी है। इस बीच पता चला है कि यह गेमिंग जोन बिना फायर एनओसी के चल रहा था। यही नहीं इस गेमिंग जोन के संचालक ने प्रशासन से इसे चलाने के लिए आवश्यक लाइसेंस भी नहीं लिया था। इस गेमिंग जोन से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही गेट था। एक ही गेट होने के कारण हादसे के बाद बहुत सारे लोग वहां से बाहर नहीं निकल सके।
गेमिंग जोन हादसे को लेकर गुजरात मॉडल का काला सच एक बार फिर सामने आया है। हादसे ने इसके सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह केंद्र फायर एनओसी के बिना चल रहा था और यहां सिर्फ एक निकास द्वार था। वीकेंड होने के कारण यहां डिस्काउंट ऑफर चल रहा था। इस वजह से शनिवार को यह आगंतुकों से खचाखच भरा हुआ था। बताया जाता है कि गेमिंग जोन में आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सही कारण का पता जांच के बाद ही चल पाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि कई शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी शिनाख्त नहीं हो पा रही है। फायर ब्रिगेड विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। अधिकारी ने कहा कि आग इतनी भयंकर थी कि कई किलोमीटर दूर से धुआं दिखाई दे रहा था। कई शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी पहचान नहीं हो पाई है। पहचान के लिए शवों और पीड़ित के रिश्तेदारों के डीएनए नमूने एकत्र किए गए हैं। बचाव कार्यों की निगरानी के लिए घटनास्थल पर पहुंची राजकोट की मेयर नयना पेधादिया ने भी फायर एनओसी नहीं होने की बात कही है। पेधादिया ने कहा, ‘हम जांच करेंगे कि इतना बड़ा गेम जोन बिना फायर एनओसी के वैâसे काम कर रहा था।

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