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खड़गे के बयान की खोदा-खोद जारी!… भाजपा को जीत की उम्मीद नजर आ रही

सामना संवाददाता / मुंबई
गुजरात चुनाव के पीक पर पहुंचने के बाद भाजपा को समझ में आ रहा है कि कहीं उसकी लुटिया डूब न जाए। इसलिए अब वो गुजरात मॉडल और विकास की बात करने की बजाय भावनाओं को भुनाने में लग गई है। पिछले चार-पांच दिनों का ट्रेंड देखने के बाद यह बात आसानी से समझी जा सकती है। अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को १०० सिर वाला रावण क्या कह दिया, भाजपा उसे भुनाने में जुट गई है। खड़गे ने इसके पहले चायवाली टिप्पणी की थी। इसके बाद भाजपा के नेताओं ने खड़गे के बयान की खोदा-खोद शुरू कर दी है।
भाजपा एक बार फिर सहानुभूति के रथ पर सवार होकर गुजरात चुनाव जीतने की योजना पर काम करने लगी है। इसीलिए भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पैâला दिया है।

गुजरात विधानसभा चुनावों में इस वक्त नेताओं की बयानबाजी उफान पर है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और सुनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए ताकि भाजपा कुछ सहानुभूति प्राप्त कर अपना वोट बढ़ा सके। कुछ समय पहले तक कांग्रेस व केजरीवाल वहां अच्छी फाइट देते नजर आ रहे थे। ऐसे में भाजपा को लग रहा था कि वह चुनाव हार सकती है। मगर अब उसे उम्मीद की किरण दिखाई पड़ गई है। यही कारण है कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ‘मौत के सौदागर’ वाले बयान की भी याद दिलाई जा रही है। ऐसा इसलिए किया रहा है, ताकि गुजरात के लोगों में गुजराती अस्मिता की भावना को उभारकर उसका दोहन किया जा सके। यही कारण है कि पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेसी नेताओं के पुराने बयानों को विभिन्न प्रसार माध्यमों पर जारी किया जा रहा है। बता दें कि हाल ही में गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक रैली के दौरान पीएम मोदी की तुलना रावण से कर दी थी। इसके पहले रविवार को उन्होंने मोदी को ‘झूठों का सरदार’ बताया था। उन्होंने कहा था कि पीएम खुद को गरीब बताकर सहानुभूति जुटाते हैं। गुजरात के स्थानीय राजनीतिक पंडितों का मानना कि खड़गे के इन बयानों को भाजपा के नेताओं ने लपक लिया है और वे विभिन्न प्रसार माध्यमों के जरिए इसे जोर-शोर से भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा भी इस मामले में कूद पड़े हैं और खड़गे के बयान को ट्विस्ट करके बता रहे हैं, ताकि गुजराती भावनाओं को उभारकर भाजपा की नैया पार लगाई जा सके।

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