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बीमारी बढ़ा रहा मौसम `बेईमान’! …एच३एन२ का बढ़ा खतरा

• कम इम्यूनिटी वाले रहें सावधान
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
बरसात का मौसम करीब-करीब समाप्त हो चुका है, जिस कारण मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। आलम यह है कि लोग दिन में गर्मी और रात में ठंडक महसूस कर रहे हैं। मौजूदा समय में यह बेईमान मौसम सर्दी-खांसी, वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया जैसी कई बीमारियों को आमंत्रण दे रहा है। इसी में अब एच३एन२ का खतरा मंडराने लगा है। बताया गया है कि बीते चार महीनों में एच३एन२ के २.८ फीसदी और एच१एन१ के मामलों में २० फीसदी की वृद्धि देखी गई है। दूसरी तरफ इसे लेकर मुंबईभर के विशेषज्ञ व चिकित्सक खासकर कम इम्यूनिटी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से ३० सितंबर तक राज्यभर में एच३एन२ के १,९०६ मामले सामने आए हैं, जिनमें से केवल जून से सितंबर तक १,३८८ केसेस सामने आए, वहीं जनवरी से मई के बीच केवल ५१८ मामले दर्ज किए गए। इसी तरह इसी अवधि के दौरान एच१एन१ के ९६२ मामले दर्ज हुए, जिनमें से ४२५ पिछले चार महीनों में, जबकि जनवरी से मई के बीच ५३७ मामले सामने आए थे। चिकित्सकों के मुताबिक, बीते साल की तुलना में इस साल महाराष्ट्र में सभी प्रकार की बीमारियों में वृद्धि देखी गई। वायरस में डेंगू, इन्फ्लूएंजा एच३एन२, आई फ्लू, मलेरिया और अन्य रोग शामिल हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन हावी हो रहा है, जिसके कारण केवल चार महीनों में इसके मामलों में तीन गुना की वृद्धि देखी गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सर्दियों के दौरान इसके और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।
मरीजों की धीमी रिकवरी
डॉ. नेताजी मुलिक ने कहा कि ऊपरी श्वसन पथ में संक्रमण के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। अब तक किए गए सभी एच३एन२ परीक्षणों में से ६० प्रतिशत सकारात्मक पाए गए हैं, जबकि उनकी रिकवरी रेट बहुत धीमी पाई गई। उनके मुताबिक यह एक वायरल बीमारी या बुखार की तरह है, जो तेजी से पैâलता है, लेकिन मरीजों को ठीक होने में कम से कम दो से तीन सप्ताह लग रहे हैं।

कम इम्यूनिटी वालों में तेजी से फैल रहा एच३एन२
मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में एच१एन१ और एच३एन२ का संक्रमण तेजी से पैâल रहा है। लोगों को सबसे अधिक एच३एन२ प्रभावित कर रहा है। जेजे अस्पताल में प्रोफेसर डॉ. मधुकर गायकवाड़ के मुताबिक, एच३एन२ के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण मौसम की स्थिति में आया बदलाव है। इस वायरस के पैâलने के लिए रुक-रुक कर होने वाली बारिश अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रही थी। उन्होंने कहा कि कम प्रतिरक्षा स्तर वाले लोगों में सर्दियों के दौरान ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण में वृद्धि होगी। ऐसे में उन्हें अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

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