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पढ़ोगे तभी बढ़ोगे! …..नई मुंबई मनपा का ख्वाब, हर हाथ में हो किताब

• झोपड़पट्टी में खुलेगी मनपा की लाइब्रेरी
• बच्चों में पढ़ने की आदत बढ़ाने पर जोर
सामना संवाददाता / नई मुंबई । नई मुंबई मनपा ने शहर के हर क्षेत्र में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई उपक्रम शुरू किए और उसे अच्छा प्रतिसाद भी मिला। अब जल्द ही झोपड़पट्टी क्षेत्रों के बच्चों को पढ़ने के प्रति रुझान को बढ़ावा देने के लिए मनपा झोपड़पट्टी क्षेत्र में लाइब्रेरी शुरू करने की तैयारी कर रही है। मनपा का ख्वाब है कि हर किसी के हाथ में किताब हो।
झोपड़पट्टी क्षेत्रों में पुस्तकालय न होने के कारण विद्यार्थियों में पढ़ने के प्रति रुझान की कमी है। साथ ही पढ़ाई के प्रति रुचि रखनेवाले लोगों को किताबें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। अब मनपा ने झोपड़पट्टी एरिया में स्कूल और पुस्तकालयों की अवधारणा को लागू करने का निर्णय लिया है। बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर मनपा ने इसे आम जनता के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए एक विशेष पुस्तकालय योजना तैयार की है।
२५% लोग झोपड़पट्टी के निवासी
नई मुंबई पालिका ने इस वर्ष पठन संस्कृति को संरक्षित करने के लिए विशेष उपाय किए हैं। ये सभी सुधार शहरी इलाकों में ही होते दिख रहे हैं। इसी बीच प्रशासन ने देखा कि मनपा के ग्रामीण और झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र उपेक्षित हैं। नई मुंबई में ४१ झुग्गी बस्तियां हैं। यह हाल के दिनों में बढ़ा है। १५ लाख के शहर की कुल आबादी का करीब २५ फीसदी पिछले कई सालों से एमआईडीसी क्षेत्र स्थित झोपड़पट्टी क्षेत्र में रह रही है। इस क्षेत्र से २२ नगरसेवक चुने जाते हैं।
स्कूलों में होंगी लाइब्रेरी
नई मुंबई मनपा ने पिछले ३० सालों में इस झोपड़पट्टी एरिया को इंप्रâास्ट्रक्चर की दृष्टि से विकसित किया है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहनेवाले बच्चों को भी पढ़ने का अधिकार है। यदि उन्हें पुस्तकालय की सुविधा प्रदान की जाए तो वे पढ़ सकेंगे। उनकी पढ़ने में रुचि पैदा करने के लिए मनपा मलिन बस्तियों, सामुदायिक मंदिरों और स्कूलों में पुस्तकालय शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर ने वास्तुकला विभाग को इस पुस्तकालय का स्थान निर्धारित करने का निर्देश दिया है। पुस्तकालय के लिए स्कूल में जगह बनाई गई है। झुग्गी बस्तियों में मनपा ने एमआईडीसी से प्लॉट लेकर स्कूल बनवाए हैं, जबकि कुछ स्कूल जिला परिषद के समय से ही चल रहे हैं। इन विद्यालयों का एक कोना पुस्तकालय के लिए आरक्षित रहेगा और जिन स्थानों पर विद्यालय नहीं है, वहां मनपा भवन में ये पुस्तकालय प्रारंभ किए जाएंगे।

 

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