मुख्यपृष्ठनए समाचारकेंद्र सरकार का आर्थिक कहर ... नहीं बन पाए गरीबों के घर!

केंद्र सरकार का आर्थिक कहर … नहीं बन पाए गरीबों के घर!

• बढ़ती ब्याज दरों ने जरूरतमंदों को किया छत से दूर
• ब्याज में साढ़े तीन फीसदी की हुई वृद्धि
• एक साल में १० फीसदी बढ़े घरों के दाम
सामना संवाददाता / मुंबई
महंगाई व गिरती अर्थव्यवस्था का असर रियल एस्टेट में भी दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार के आर्थिक कहर के कारण लोगों के घर नहीं बन पा रहे हैं। ब्याज की बढ़ी हुई दरों ने इसे प्रभावित किया है और इस कारण लोगों के घर का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। लोन इंटरेस्ट के आसमान पर पहुंचने से घर खरीदने वालों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। होम लोन की दरें पिछले साल की शुरुआत में ६.५ फीसदी से बढ़कर ९ फीसदी के करीब पहुंच गई हैं। इसी तरह पिछले एक साल में आवासीय कीमतों में औसतन ७-१० फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
बता दें कि ऑन-द-ग्राउंड मूल्य निर्धारण ने कई क्षेत्रों में दो अंकों की वृद्धि का संकेत दिया है। घर खरीदना महंगा होता जा रहा है। मुंबई, पुणे, बंगलुरु, गुजरात, कोलकाता जैसे राज्यों और बड़े शहरों में यह स्थिति देखी जा रही है। ‌देशभर में औसतन २० फीसदी और मूल्य के लिहाज से २३ फीसदी की गिरावट देखी गई है। रियल एस्टेट के जानकारों का मानना है कि मांग में नरमी कम-से-कम अगले छह महीनों तक बने रहने की संभावना है। आरबीआई पॉलिसी का हवाला देते हुए बताया जाता है कि रेपो रेट में की गई बढ़ोतरी से किफायती और मध्यम आयवर्ग परिवारों में घरों की खरीदारी पर असर बना रहेगा। हाउसिंग लोन महंगा होने से लोग घर खरीदने से पीछे हट रहे हैं।‌ मांग में कमी और लगातार उच्च मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी के कारण आवास बाजार में गति कुछ मंदी के संकेत दिखा रही है। जब तक कि ब्याज दरें बढ़ती रहेंगी और कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी।

ग्राहक रहें अधिक सतर्क
कुछ प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के त्रैमासिक आंकड़े बताते हैं कि बिक्री बुकिंग में एकमुश्त गिरावट आई है। कुछ मामलों में कीमत वसूली में कमी आई है। यह एक संकेत है कि कंपनियों को कम कीमतों पर बिक्री करनी पड़ सकती है या उनकी बिक्री पहले की तुलना में कम कीमतों पर हो रही है। उच्च ब्याज दरों और कीमतों के दबाव के चलते ग्राहक अपने खरीदारी के पैâसले को लेकर अधिक सतर्क हैं। स्टार्टअप्स के बीच प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हाल ही में नौकरी छूटने और मंदी के खतरे ने भी वेतनभोगी वर्ग के बीच एक मनोविकृति पैदा कर दी है।

ब्याज दर चक्र को उल्टा करना होगा
विशेषज्ञ बताते हैं कि वर्ष २०२२ में बेची गई एक संपत्ति सलाहकार की हालिया रिपोर्ट ने नौ वर्षों में पहली बार मांग से अधिक आपूर्ति दिखाई। बिना बिके इन्वेंट्री के ढेर लग रहे हैं। बिक्री का समय तीन साल से कम था, लेकिन अगर यह इससे अधिक हो जाता है तो यह बुरी खबर होगी। मांग में तेजी लाने के लिए ब्याज दर चक्र को उल्टा करना होगा। अगर दर वृद्धि चक्र में ठहराव होता है, तब भी यह ऊंचे स्तर पर बना रहेगा। लोग ४-५ साल पहले की तुलना में घर खरीदने की क्षमता अधिक होने की बात कर रहे थे, लेकिन जब खरीदारी के पैâसले लेने की बात आती है तो खरीदार इसमें शामिल नहीं होते।

अन्य समाचार