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कैंसर को मात दे मिसाल बनी बुजुर्ग! … पित्ताशय के कैंसर से थी पीड़ित

चीन में रोबोट ने ब्रैकीथेरेपी से किया ठीक
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई में रहनेवाली ६१ वर्षीय बुजुर्ग महिला ने पित्ताशय के वैंâसर को मात देकर दूसरे मरीजों के लिए मिसाल कायम की है। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ साल से बुजुर्ग महिला पित्ताशय के कैंसर से जूझ रही थी। इस मामले में सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि चीन के चर्चित अस्पताल फूडा अस्पताल में इस महिला का इलाज महज एक दिन में बिना चीर फाड़ के रोबोट की मदद से किया। रोबोट ने ब्रैकीथेरेपी के जरिए महिला के पित्ताशय के कैंसर का इलाज किया है।
मुंबई की रहनेवाली ६१ वर्षीय मधु पाठक को जनवरी २०२२ में पित्ताशय के कैंसर (एडेनोकार्सिनोमा) का पता चला, जो कई लिम्फ नोड्स में तेजी से फैल चुका था। इसके बाद मुंबई में छह महीने तक की गई कीमोथेरेपी के कई सत्रों के बाद भी कैंसर ठीक नहीं हो रहा था। इसी बीच बुजुर्ग का इलाज करनेवाले डॉक्टरों ने उनके परिजनों को इस तरह के कैंसर के इलाज के लिए कारगर बनी ब्रैकीथेरेपी का सुझाव दिया। हालांकि, देश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही यह थेरेपी की जाती है। लेकिन चीन के चर्चित फूडा कैंसर अस्पताल में इस थेरेपी की अत्याधुनिक तकनीक होने के कारण डॉक्टर ने महिला के परिजनों को चीन जाने का सुझाव दिया। महिला की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजन चीन जाने के लिए राजी हो गए। फूडा अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अनूप अबोटी ने बताया कि एडवांस मिनिमली इनवेसिव ब्रैकीथेरेपी और इंटरवेंशनल लोकलाइज्ड कीमोथेरेपी के जरिए महिला के पित्ताशय के वैंâसर का इलाज किया गया। उन्होंने बताया कि ब्रैकीथेरेपी पेट और हड्डियों के वैंâसर के लिए काफी कारगर साबित है। हिंदुस्थान में भी ब्रैकीथेरेपी की जाती है लेकिन इसकी उन्नत तकनीक चीन में उपलब्ध है। डॉ. अनूप ने बताया कि ब्रैकीथेरेपीr एक तरह का रेडिएशन होता है। इसमें नीडल की मदद से रेडिएशन की बीज सीधे ट्यूमर पर डाला जाता है। इसके चलते यह बीज उस ट्यूमर को धीरे-धीरे गला देती है।

क्या कहते हैं अन्य डॉक्टर
अंधेरी के कोकिला बेन अंबानी अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. प्रणव चड्ढा ने बताया कि कोई भी तकनीकी का उसके परिणाम पर निर्भर होती है। यह जरूरी नहीं कि जो चीज नई है वह अच्छी ही हो। इसके साथ ही वैंâसर किस चरण में है यह भी देखना जरूरी होता है। एक मरीज के परिणाम के आधार पर तकनीकी की कारगरता के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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