मुख्यपृष्ठनए समाचारआ गया टीबी का काल!....हिंदुस्थान ने विकसित की वैक्सीन

आ गया टीबी का काल!….हिंदुस्थान ने विकसित की वैक्सीन

• नई वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल शुरू
• महाराष्ट्र सहित छह राज्यों में परीक्षण जारी

सामना संवददाता / मुंबई । हिंदुस्थान टीबी की बीमारी को समूल नष्ट करने के लिए नई वैक्सीन का इजाद कर रहा है। वैक्सीन बनकर तैयार है, जिसके तीसरे चरण का ट्रायल शुरू है। यह परीक्षण महाराष्ट्र सहित छह राज्यों के १८ शहरों में किया जा रहा है। अनुमान लगाया गया है कि वैक्सीन का परीक्षण २०२४ तक पूरा होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र आईसीएमआर-एनएआरआई का मुख्य स्थल है। अभी तक इसने १,५९३ लोगों का पंजीकरण पूरा किया है। इन लोगों पर ३८ महीने के लिए नियमित अंतराल पर नजर रखी जा रही है। पुणे में ट्रायल के बाद फॉलोअप फरवरी २०२४ तक चलेगा, जिसके बाद सब सही रहा तो टीबी रोकथाम की वैक्सीन आ सकती है।
संचार रोकने पर चल रहा परीक्षण
इस वैक्सीन के ट्रायल में शामिल नेशनल एड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट पुणे के डॉ. सूचित कांबले के अनुसार लार संबंधी पॉजिटिव पल्मोनरी टीबी मरीजों से स्वस्थ व्यक्तियों में टीबी के संचार को रोकने के लिए दो टीबी टीकों वीपीएम १००२ और इम्यूनोवैक की प्रभावकारिता व सुरक्षा को परखने के लिए परीक्षण चल रहे हैं। कांबले ने कहा कि आंकड़े के विश्लेषण के बाद वैज्ञानिक निष्कर्ष के आधार पर हम इन टीकों के प्रभावों और सुरक्षा के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि २०२४ तक या अधिक-से-अधिक २०२५ तक हिंदुस्थान के पास टीबी के विरुद्ध अच्छा व प्रभावी टीका होगा।
१२,००० लोगों पर परीक्षण
इस वैक्सीन का ट्रायल हिंदुस्थान के ६ राज्यों महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा के १८ शहरों में चल रहा है, जिसमें १२ हजार से ज्यादा लोगों ने पंजीयन कराया है। वर्तमान में जन्म के समय बीसीजी वैक्सीन का बच्चों में प्रयोग किया जाता है। यह ट्रायल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की निदेशक डॉ. प्रिया अब्राहम के अनुसार आईसीएमआर-एनएआरआई हिंदुस्थान के टीबी उन्मूलन के लक्ष्य में मदद करने के लिए विभिन्न मोर्चों पर काम कर रही है। इसमें मल्टी-ड्रग प्रतिरोधी टीबी और टीबी वैक्सीन ट्रायल के लिए उपचार ट्रायल शामिल हैं।

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