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देश में पहली सर्जिकल स्ट्राइक शिवराय के काल में हुई थी -शरद पवार

• तिलक का योगदान भूल नहीं सकते
• नया इतिहास तैयार करने का काम लोकमान्य ने किया

सामना संवाददाता / मुंबई
देश में पहली सर्जिकल स्ट्राइक शिवराय के शासनकाल में लाल महल में हुई थी। लाल महल में शिवराय ने शाइस्ता खां की उंगलियां काट दीं। शिवराय ने ही हिंदू स्वराज्य की नींव रखी थी। उन्होंने प्रजा का साम्राज्य निर्माण किया।
लोकमान्य ने स्वराज के लिए आंदोलन किया। केसरी और मराठा समाचार पत्र के माध्यम से उन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए, यह बात राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद शरद पवार ने कही। उन्होंने आगे कहा कि हम तिलक और महात्मा गांधी के योगदान को नहीं भूल सकते। लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डॉ. दीपक तिलक द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार उपस्थित थे। इस मौके पर पवार ने छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्यों के महत्व के बारे में बताया। देश में पुणे शहर का एक अलग ही महत्व है। छत्रपति शिवाजी महाराज और उनका इतिहास पूरी दुनिया जानती है, उनका जन्म इसी जिले के इसी शहर में हुआ था।
उनका बचपन यहीं बीता। शिवाजी महाराज ने हिंदू स्वराज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया। उन्होंने भोसलों का राज्य नहीं, बल्कि हिंदू स्वराज्य, प्रजा का राज्य स्थापित किया। यह गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है। बाद में इस देश के जवानों ने देश की रक्षा के लिए एक तरह की सर्जिकल स्ट्राइक की। उसकी चर्चा अब हो रही है। लेकिन यह नहीं भूला जा सकता कि इस देश में पहली सर्जिकल स्ट्राइक शिव छत्रपति के काल में हुई थी, जब शाइस्ता खां लाल महल आया था। १८६५ में लोकमान्य तिलक के पिता गंगाधर पंत रत्नागिरी छोड़कर पुणे आ गए। यह महज आगमन नहीं, बल्कि एक तरह की चिंगारी थी। इसके बाद इस चिंगारी ने आजादी की मशाल का रूप ले लिया, ऐसा शरद पवार ने इस मौके पर कहा। लोकमान्य तिलक ने कहा कि ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’, ऐसी भावना जनमानस के मन में उन्होंने भरी ऐसा शरद पवार ने कहा।
पत्रकारिता पर नहीं होना चाहिए दबाव
शरद पवार ने अपने भाषण में कहा कि लोग जानते थे कि अगर अंग्रेजों की गुलामी से बाहर निकलना है तो आम आदमी को जागृत करना होगा। उन्हें एहसास हुआ कि इसके लिए एक धारदार हथियार की आवश्यकता है इसलिए उन्होंने केसरी और मराठा समाचार पत्र शुरू किए। केसरी का मतलब शेर होता है। लोकमान्य तिलक ने पत्रकारिता के माध्यम से विदेशी आक्रांताओं पर प्रहार किया। वे हमेशा कहते थे कि पत्रकारिता पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए, शरद पवार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने हमेशा इस भूमिका का पालन किया है।

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