मुख्यपृष्ठनए समाचारप्राइवेट स्कूलों में पढ़नेवाले आदिवासी छात्रों का भविष्य खतरे में

प्राइवेट स्कूलों में पढ़नेवाले आदिवासी छात्रों का भविष्य खतरे में

सामना संवाददाता / मुंबई

रोकी गई २२६ करोड़ की सब्सिडी, घाती सरकार फंड देने के पक्ष में नहीं  

घाती सरकार के आदिवासी विभाग ने प्रतिष्ठित स्कूलों के २२६ करोड़ रुपए की सब्सिडी यह कहकर रोक दिया है कि कोरोना काल में आदिवासी छात्रों को क्या शिक्षा दी गई। हालांकि, स्वूâलों का कहना है कि हमने छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा दी है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि उन्हें ८० प्रतिशत सब्सिडी दी जानी चाहिए, लेकिन आदिवासी विभाग के सामने समस्या यह है कि जब ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी तो इसका सत्यापन स्तापना किया जाएगा। इस विवाद के कारण प्रदेश के ५० हजार से अधिक आदिवासी छात्रों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ने की आशंका है।

आदिवासी समुदाय के छात्रों को अन्य छात्रों की तरह शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आदिवासी विकास विभाग ने साल २०१४ से राज्य के प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्वूâलों में इन छात्रों को मुफ्त एडमिशन की योजना लागू किया है। आदिवासी विकास विभाग द्वारा इन छात्रों को आवास से लेकर शैक्षणिक खर्च जैसे फीस, भोजन, पाठ्य सामग्री आदि के लिए प्रति छात्र ५० से ६० हजार रुपए का भुगतान किया जाता है। सरकार हर साल प्रतिष्ठित स्वूâलों के माध्यम से आदिवासी छात्रों पर लगभग ३७० करोड़ रुपए खर्च करती है। शैक्षणिक वर्ष २०२०-२१ में राज्य में कोरोना के कारण स्वूâल-कॉलेज कभी खुले तो कभी बंद रहे। जिससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा दी गई इसलिए संस्थान प्रबंधन द्वारा छात्रों की पढ़ाई के लिए अनुदान की मांग की गई।

फंड देने का विरोध

इस समय घाती सरकार के वित्त विभाग ने फंड देने का विरोध करते हुए सवाल उठाया है कि कोरोना काल में स्कूल बंद थे। ऐसे में स्कूल को सब्सिडी कैसे दें। इस बीच संस्थान प्रबंधन ने यह मुद्दा उठाया कि कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बावजूद छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा के साथ-साथ शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। इसलिए शिक्षण संस्थानों ने कम से कम ८० फीसदी सब्सिडी देने की मांग की है। हालांकि, सरकार ने साल २०२०-२१ में २५ फीसदी राशि और ३० फीसदी निधि वितरित करने के आदेश जारी किए हैं। वर्ष २०२१-२२ में ३० प्रतिशत अनुदान वितरित किया गया है।

कैसे करें ऑनलाइन शिक्षा का सत्यापन

शिक्षण संस्थान ने दावा किया है कि कोरोना काल में नामी स्वूâल चल रहे थे। हालांकि, इस अवधि में स्वूâल बंद थे तो शुल्क क्यों दिया जाए। इस तरह का मुद्दा घाती सरकार ने उठाया है। सरकार ने छात्र उपस्थिति का सत्यापन कर अनुदान वितरण करने का निर्देश दिया है, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि ऑनलाइन शिक्षा का सत्यापन वैâसे किया जाए। फिलहाल, शिक्षण संस्थान अनुदान की मांग कर रहे हैं।

निधि की प्रतीक्षा

वित्त वर्ष २०२०-२१ में कोरोना काल का दौर शुरू था। उस समय महाविकास आघाड़ी की सरकार थी। तमाम वित्तीय संकटों के बावजूद मविआ ने वर्ष २०२०-२१ में ७९.५५ करोड़ और साल २०२१-२२ ८३.९० करोड़ रुपए की सब्सिडी स्वूâलों को उपलब्ध करा दी थी। फिलहाल, शेष १३० करोड़ रुपए की मांग वाले निधि के प्रस्ताव आदिवासी विभाग ने सरकार के पास भेजा है। इस निधि की प्रतीक्षा की जा रही है। इस तरह की जानकारी आदिवासी विभाग की आयुक्त नयना गुंडे ने दी है।

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