मुख्यपृष्ठनए समाचार`घाती' सरकार कर रही घात समय गया बीत, फिर भी नहीं है...

`घाती’ सरकार कर रही घात समय गया बीत, फिर भी नहीं है सुध … दूध पर अनुदान को लेकर नहीं शुरू हलचल

 किसान सभा ने आंदोलन की दी चेतावनी
सामना संवाददाता / मुंबई
`घाती’ सरकार में डेयरी विकास मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील ने सदन में घोषणा की कि दूध की कीमत पर राहत देने के लिए दूध उत्पादकों को पांच रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए एक जनवरी से नया मस्टर तो शुरू हो गया है, लेकिन सब्सिडी और अन्य मांगों पर किसी तरह की हलचल हो नहीं रही है। कुल मिलाकर समय तो बीत गया लेकिन इस सरकार को किए गए वादों की सुध ही नहीं रही। दुग्ध उत्पादक किसानों के साथ एक तरह से `घाती’ सरकार घात कर रही है। ऐसे में अखिल भारतीय किसान सभा ने चेतावनी दी है कि सब्सिडी और अन्य मांगों पर निर्णय नहीं होने पर प्रदेश भर में फिर से आंदोलन करने पर किसान बाध्य होंगे।
राज्य में एक जनवरी से दूध संग्रहण का नया मस्टर शुरू हो गया है। दूध उत्पादकों को उम्मीद थी कि इस मस्टर में सब्सिडी मिलेगी। लेकिन भले ही समय बीत चुका है और नया मस्टर भी शुरू हो गई है, फिर भी किसानों को सब्सिडी देने के लिए कोई हलचल शुरू नहीं हुई है। बताया गया है कि अनुदान की फाइल वित्त विभाग के पास पड़ी है और जब तक वित्त विभाग और वैâबिनेट का निर्णय नहीं हो जाता, शासनादेश जारी नहीं होगा। इस तरह की जानकारी अजीत नवले ने दी।
किसान विरोधी है सरकार की भूमिका
नवले ने आरोप लगाया है कि जब किसान संकट में होते हैं तो सरकार सब्सिडी नहीं देती है। इसके बाद जब मार्च के दौरान दूध की कमी शुरू होने लगती है तो अपने आप ही कीमतें बढ़ जाती हैं। इसलिए सरकार सब्सिडी लागू करने की बजाय समय बिताती है, जो किसान विरोधी है और दूध व्यवसाय के लिए बेहद घातक है।
कैबिनेट बैठक में सरकार ले अंतिम निर्णय
सरकार को बिना किसी देरी के होनेवाली कैबिनेट बैठक में इस संबंध में अंतिम निर्णय लेना चाहिए। सहकारी दुग्ध संघों के साथ-साथ निजी दुग्ध संघों को दूध आपूर्ति करनेवाले किसानों को पांच रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी देने तथा निजी एवं सहकारी दुग्ध संघों के लिए ५ रुपए प्रति लीटर की दर से भुगतान करना अनिवार्य करने का निर्णय लिया जाना चाहिए। सरकार की घोषणा के अनुसार, किसानों को ३४ रुपए प्रति लीटर और पशु आहार की कीमत कम करने के लिए ठोस कदम उठाया जाना चाहिए। अगर सरकार कल की बैठक में इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो किसान सभा एक बार फिर पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन शुरू करेगी।
किसान सभा की ये है मांग
महाराष्ट्र में ७२ प्रतिशत दूध की आपूर्ति निजी संस्थानों द्वारा की जाती है। इससे ७२ फीसदी किसान सरकार द्वारा दुग्ध अनुदान के लिए गए पैâसलों से वंचित रह जाएंगे। यह किसानों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। सरकार को भेदभाव नहीं करना चाहिए। अजीत नवले ने मांग की है कि सरकार निजी और सहकारी दुग्ध संस्थाओं को ५ रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी दे।

अन्य समाचार