मुख्यपृष्ठस्तंभकथा अनंता: कागज की महिमा न्‍यारी है!

कथा अनंता: कागज की महिमा न्‍यारी है!

डाॅ. अनंत श्रीमाली। यूक्रेन में असली और महाराष्‍ट्र में पेन ड्राइव बम का मौसम चल रहा है। पेन ड्राइव के निर्माण पर रोक लगनी चाहिए। सोने की लंका में परीक्षा बोर्ड के पास कागज-स्‍याही खत्‍म हो गई। सरकार के पास पैसा नहीं है। परीक्षाएं रद्द करने पर ४५ लाख विद्यार्थियों का भविष्‍य अधर में है (वैसे भी आजकल विद्यार्थियों के हाथ में मिसाइलनुमा मोबाइल और चेहरे से स्‍माइल गायब है)। कोविड में श्रीनगर के स्‍कूल बंद हुए थे तो दक्षिण कश्‍मीर के पुलवामा जिले का ऑखूं, जिसे ‘पेंसिल विलेज’ कहा जाता है, वहां पेंसिल की बिक्री ७० प्रतिशत घट गई, व्‍यापार चौपट हो गया। इस लकड़ी से नटराज, अप्‍सरा जैसी नामचीन पेंसिलें बनती हैं। २०० करोड़ के टर्न ओवर वाले १८ कारखानों के ४ हजार लोगों की आजीविका संकट में है। उधर, दुबई सरकार दुनिया की १०० प्रतिशत डिजिटल पेपरलेस सरकार बन गई। इससे ३५ करोड़ अमेरिकी डॉलर और १.४ करोड़ श्रम घंटों की बचत होगी। कागज की खपत में ३३६ मिलियन की कटौती हुई। कागज के लिए हम वन-वृक्ष काटते हैं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार पिछले वर्ष ३१ लाख पेड़ों की हत्‍या की गई। समय आ गया है कि पर्यावरण बचाने के लिए पेपरलेस कार्य को बढ़ावा दें। हमारे यहां ये जरा टेढ़ा काम है क्‍योंकि अधिकांश योजनाएं कागजों पर ही बनती हैं। राजस्‍थान में तो गुरुकुल विश्‍वविद्यालय कागज पर चल रहा था और उसे कानूनी जामा पहनाने के लिए बिल भी पेश कर दिया गया। आनन-फानन में वापस लेना पड़ा। कुछ लोग देश, तो कुछ बैंक लूट रहे हैं। बढ़िया काम चल रहा है।
अनाथों के नाथ और भोलेनाथ
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ तहसीलदार कोर्ट ने १० लोगों सहित भगवान भोलेनाथ को सीधे नोटिस दे दिया कि सुनवाई के दौरान न आने पर १० हजार जुर्माना व जमीन से बेदखली होगी। कारण सरकारी जमीन पर कब्‍जा कानूनन अपराध है। जब भोलेनाथ नहीं बच सके तो अनाथ, मनोरोगी वैâसे बचें? ठाणे के मेंटल अस्‍पताल में ४३० ऐसे मनोरोगी हैं, जो पूर्णत: स्‍वस्‍थ हो गए हैं, पर परिजन लेने नहीं आ रहे हैं। मजबूरी में स्‍वस्‍थ रोगी मनोरोगियों के साथ रह रहे हैं। कई रोगी बरसों से ‘अपनों’ द्वारा अपने घर जाने का इंतजार कर रहे हैं पर ‘अपने’ उन्‍हें स्‍वीकार नहीं कर रहे हैं। ‘अपनों’ ने ऐसा मुंह मोड़ा कि अपना फोन, घर, संपर्क सब बदल लिया है। वैâसा समय आ गया है? हम अपनों से वैâसे मुंह मोड़ सकते हैं? हमारी संवेदनाएं कितनी भोथरी हो गई हैं?
‘जान खाये सैंया हमारो’
राजनीतिक खबरें चटखारे लेकर पढ़ी-सुनी जाती हैं। आज का सबसे धांसू- ज्‍वलंत विषय है। हम राजनीति के पीछे का कड़वा सच नहीं जानते, जैसे फिल्‍मों की चकाचौंध के पीछे घना अंधेरा है। मुजफ्फरनगर के एक नेता की पत्‍नी ने पति पर पैसे के लिए उसे अपने दोस्‍तों को बेचने का आरोप लगाया, ये वही नेता हैं, जिनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे रोते हुए बता रहे हैं कि काफी पैसा देने के बाद भी उन्‍हें टिकट नहीं दिया (इसके बाद महिला को दूसरी पार्टी ने टिकट दिया और वह अच्‍छे-खासे मतों से हार गर्इं)। इसी प्रदेश में एक मुस्लिम महिला के भाजपा को वोट देने पर उसे उसके पति ने घर से निकाल दिया और तलाक की धमकी दी। बरेली के एजाज नगर, गौंटिया की उजमा ने साल भर पहले तस्‍लीम से निकाह किया था और भाजपा समर्थक थी। कुछ लोग राजनीति में पैदाइशी खुन्नसबाज होते हैं। ‘शमशाद बेगम, आशा भोसले के गीत की पैरोडी व्यंग्यकार सूर्य कुमार पांडे ने लिखी है कि- ‘जान खाए सैंया हमारो।’
ताजमहल के बदले पानी की टंकी
गर्मी शुरू हुई नहीं कि जल संकट आ गया, अब आ गया तो क्‍या करें। सभी जगह बह‍ुतै जल संकट चल रहा है। अच्‍छा है, देश में कुछ चलते रहना चाहिए। बारिश में मुंबई भी पानी-पानी हो जाती है। ताजमहल तक जल संकट से प्रभावित है उसके अंदर नलों में पानी नहीं है और बाहर का पानी ले जाने की अनुमति नहीं है। शाहजहां को ये मालूम होता तो मुलाजिमों का हुक्‍का-पानी बंद कर देता। वह भावी जल संकट से वाकिफ होता तो निश्चित रूप से ताजमहल के बदले पानी की टंकी बनवाता। प्‍यासों को पानी मिलने पर मुमताज को भी ठंडक मिलती। घाट-घाट का पानी पीनेवाली उप्र सरकार के बारे में पता चल रहा है कि वह कितने ‘पानी’ में है? पानी है नहीं और आग लगी हुई है। अधजल गगरी छलक रही है। अभी मार्च में ये हाल है तो आगे मंसूबों पर पानी फिर सकता है। बोस होते तो नारा देते, तुम मुझे पानी दो, मैं तुम्‍हें…। बच्‍चे वैâसे कहें- पानी दे, गुड़धानी दे। तो भाई लोगों ‘पानी’ का स्‍तर बनाए रखें…
(लेखक सुप्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार, मंच संचालक और स्‍तंभकार हैं)

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