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किसानों के मुद्दे पर सामने आए सरकार… सत्र के दूसरे दिन विपक्ष की गूंजी ललकार

सामना संवाददाता / मंबई

एक ओर जहां राज्य के किसान बड़े संकट से जूझ रहे हैं, वहीं राज्य सरकार मस्ती में दिख रही है। राज्य के किसान इतने संकट में हैं कि अब वे अपने अंग बेचने को मजबूर हैं, लेकिन यह निष्क्रिय सरकार सिर्फ घोषणा करती है कि हमने बहुत कुछ दिया, जबकि किसानों को कुछ नहीं मिला। यह आरोप लगाते हुए शुक्रवार को विधानसभा में विपक्ष ने हंगामा मचाया और सभा का त्याग किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार किसानों के मामले पर चर्चा के लिए सकारात्मक नहीं है। यदि सरकार सदन में चर्चा के लिए तैयार है तो फिर चर्चा क्यों नहीं करा रही है। इससे सरकार की मंशा साफ झलक रही है।
सदन में विपक्ष नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार का घेराव करते हुए कहा कि किसानों के मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई तो हमें चर्चा में कोई दिलचस्पी नहीं है। विपक्ष इस चर्चा में भाग नहीं लेगा। सदन के बाहर सीढ़ियों पर विपक्षी दलों ने मिलकर सरकार विरोधी नारे लगाए और सरकार के खिलाफ जमकर बयान दिया। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष और एनसीपी के विधायकों ने सीढ़ियों पर संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। हाथों में किसानों की तमाम फसलों को लेकर सरकार का ध्यान खींचने का प्रयास किया। इस दौरान विधान परिषद के विपक्ष नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह सरकार निर्दयी हो गई है। राज्य के किसानों के भले की सोचने की बजाय कुछ चुनिंदा लोगों के बारे में ही सोच रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के मुद्दों पर चर्चा करानी होगी।
किसानों के मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि राज्य पर ७ लाख करोड़ रुपए का कर्ज है और किसानों से भी वह कर्ज वसूलेगी तो किसानों को भुगतान करने में आनाकानी क्यों कर रहे हैं? नाना पटोले ने किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हम यहां किसानों और जनता के मुद्दे पर चर्चा करने आए हैं, भ्रम पैदा करने नहीं। हम भ्रम पैदा कर सकते थे और काम बंद कर सकते थे, लेकिन हम चर्चा करना चाहते हैं। कपास, धान, संतरा, सोयाबीन, अंगूर, प्याज, होनेवाली आय से कोई किसान संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें भारी नुकसान हुआ है, अब चर्चा ही चाहिए।

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